Gaya News: बोधगया में बोधगया भूमि मुक्ति आंदोलन (Bodh Gaya Land Liberation Movement) से जुड़े शहीद रामदेव मांझी और पांचु मांझी के शहादत दिवस पर रविवार को श्रद्धांजलि सम्मेलन आयोजित किया गया. छात्र-युवा संघर्ष वाहिनी, लोक समिति और मजदूर-किसान समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सम्मेलन की शुरुआत शहीद स्थल पर पुष्पांजलि अर्पित कर की गयी. कार्यक्रम में सैकड़ों मजदूर, किसान और महिलाएं शामिल हुए.
1979 में हुआ था मजदूरों के जुलूस पर हमला
लोक समिति के राष्ट्रीय संयोजक कौशल गणेश आजाद ने कहा कि आठ अगस्त 1979 को मठ से जुड़े लोगों ने शांतिपूर्ण और निहत्थे मजदूरों के जुलूस पर बम और बंदूक से हमला किया था. इस घटना में रामदेव मांझी और पांचु मांझी शहीद हो गये थे. उन्होंने कहा कि दोनों की शहादत के बाद बोधगया भूमि मुक्ति आंदोलन (Bodh Gaya Land Liberation Movement) और तेज हुआ और इसका विस्तार कई इलाकों तक हुआ.
शहादत के बाद तेज हुआ भूमि आंदोलन
कौशल गणेश आजाद ने कहा कि रामदेव मांझी और पांचु मांझी की शहादत के बाद आंदोलन को नई ताकत मिली. उनके अनुसार, मठ के कब्जे वाली हजारों एकड़ जमीन मजदूरों और गरीबों के बीच बांटी गयी. उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण आंदोलन को दमन के जरिए दबाया नहीं जा सकता, बल्कि इससे संघर्ष और तेज व व्यापक होता है.
मठ की जमीन वापस लेने के बयान पर जताया विरोध
सम्मेलन में कौशल गणेश आजाद ने मुख्यमंत्री की ओर से पहले बांटी जा चुकी मठ की जमीन वापस लेने की बात कहे जाने पर भी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने इसे लंबे समय से चल रहे बोधगया भूमि मुक्ति आंदोलन के संघर्ष को चुनौती देने वाला कदम बताया. उन्होंने कहा कि मजदूरों और गरीबों के अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर शांतिपूर्ण संघर्ष जारी रहेगा.
सामाजिक गैरबराबरी के खिलाफ संघर्ष का आह्वान
लोक समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष गिरिजा सतीश ने अपने संदेश में कहा कि रामदेव मांझी और पांचु मांझी की शहादत शांतिपूर्ण संघर्ष के लिए प्रेरणा देती है. उन्होंने सामाजिक गैरबराबरी, भ्रष्टाचार और नौकरशाही के खिलाफ शांतिपूर्ण तरीके से संघर्ष करने का संकल्प लेने का आह्वान किया.
शहीदों का स्मारक बनाने की उठी मांग
डॉ. मुंद्रिका प्रसाद नायक ने रामदेव मांझी और पांचु मांझी की याद में स्मारक बनाने की मांग उठायी. उन्होंने बताया कि इस मांग को लेकर गया के सांसद सह केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी से एक प्रतिनिधिमंडल मिलने की बात कही गयी है. सम्मेलन में शहीदों की स्मृति को संरक्षित करने पर भी जोर दिया गया.
कई नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने रखी बात
सम्मेलन को रमेश यादव, मजदूर-किसान समिति के जिलाध्यक्ष बिशुनधारी यादव, जनार्दन यादव, जगदेव सिंह, पूर्व मुखिया राजेंद्र मेहता, मुन्नी देवी, अंकित कुमार, बिंदू सिंह, जयकिशन और उमेश उषा समेत अन्य लोगों ने संबोधित किया. कार्यक्रम की अध्यक्षता उपेंद्र सिंह ने की, जबकि संचालन राजेंद्र मांझी ने किया.
शहादत दिवस पर संघर्ष जारी रखने का संकल्प
Bodh Gaya Land Liberation Movement के शहीदों को श्रद्धांजलि देने पहुंचे लोगों ने रामदेव मांझी और पांचु मांझी के संघर्ष और बलिदान को याद किया. सम्मेलन के दौरान सामाजिक बराबरी, मजदूर-किसानों के अधिकार और शांतिपूर्ण आंदोलन को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया गया.
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