आपदाएं आत्मविश्वास व मानसिक स्थिरता पर गंभीर प्रभाव डालती हैं -डॉ काव्या

कठपुतली के माध्यम से छात्राओं ने दिखाया पोषण और मानसिक स्वास्थ्य का अनोखा संबंध

कठपुतली के माध्यम से छात्राओं ने दिखाया पोषण और मानसिक स्वास्थ्य का अनोखा संबंध मगध विश्वविद्यालय में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित वरीय संवाददाता, बोधगया. मगध विश्वविद्यालय के गृहविज्ञान विभाग की ओर से आइक्यूएसी और इनरव्हील क्लब सनराइज गया जी के संयुक्त तत्वावधान में आपदाओं और आपातकालीन परिस्थितियों में मानसिक स्वास्थ्य विषय पर एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया. इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में मानसिक स्वास्थ्य और पोषण के बीच गहरे संबंध को समझाना और आपदा जैसी संकटपूर्ण परिस्थितियों में मानसिक संतुलन बनाये रखने के महत्व को उजागर करना था. कार्यक्रम में मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ काव्या कया ने छात्रों को संबोधित किया. कहा, आपदाएं केवल शारीरिक या बाहरी नुकसान नहीं पहुंचातीं, बल्कि व्यक्ति के आत्मविश्वास और मानसिक स्थिरता पर गंभीर प्रभाव डालती हैं. उन्होंने बताया कि मानसिक स्वास्थ्य किसी विलासिता का विषय नहीं है, बल्कि जीवन की बुनियादी आवश्यकता है. उन्होंने छात्रों से कहा कि तनाव, चिंता और अवसाद जैसी समस्याओं को अनदेखा नहीं करना चाहिए और समय रहते उचित परामर्श व सहायता लेना आवश्यक है. कार्यक्रम का सबसे रोचक और प्रभावशाली हिस्सा रही गृहविज्ञान विभाग की छात्राओं की ओर से प्रस्तुत कठपुतली की प्रस्तुति. इस प्रस्तुति में छात्राओं ने पोषण और मानसिक स्वास्थ्य के महत्व को सजीव और रचनात्मक तरीके से प्रदर्शित किया. कठपुतलियों के माध्यम से उन्होंने दर्शकों को समझाया कि कैसे संतुलित आहार मानसिक स्थिति को प्रभावित करता है और शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है. इस अनोखी प्रस्तुति को देखने के बाद उपस्थित अतिथियों और छात्रों ने छात्राओं की रचनात्मकता और जागरूकता प्रयास की जमकर सराहना की. कार्यक्रम में विशेष रूप से इनरव्हील क्लब सनराइज गया जी की अध्यक्ष निभा जायान एवं डॉ लवली उपस्थित रहीं. उन्होंने सभी अतिथियों को सम्मानित करते हुए कहा कि मानसिक स्वास्थ्य पर समाज में अभी भी कई भ्रांतियां प्रचलित हैं. उनका मानना है कि जब शिक्षित युवा इस दिशा में सक्रिय होंगे, तभी समाज में सचमुच मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता आयेगी. उन्होंने छात्राओं के कठपुतली प्रस्तुति और रचनात्मक प्रयासों की भी जमकर प्रशंसा की और इसे शिक्षा एवं समाज सेवा का उत्कृष्ट उदाहरण बताया. कार्यक्रम में गृहविज्ञान विभाग की शिक्षिकाएं, कर्मचारी और बड़ी संख्या में छात्राएं उपस्थित रहीं. छात्राओं ने पूछे प्रश्न छात्राओं ने अपने मन और पोषण से जुड़ी मानसिक समस्याओं पर कई प्रश्न पूछे, जिनका डॉ काव्या ने विस्तारपूर्वक और सटीक उत्तर दिये. इस संवाद ने छात्रों को मानसिक स्वास्थ्य और पोषण के प्रति सचेत और जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी. इस आयोजन ने छात्रों में आपदा जैसी परिस्थितियों में मानसिक स्थिरता बनाये रखने, तनाव और चिंता से निबटने तथा सही पोषण अपनाने के प्रति जागरूकता पैदा की. अंततः यह कार्यक्रम न केवल एक शैक्षिक प्रयास था, बल्कि समाज में मानसिक स्वास्थ्य और पोषण के महत्व को रचनात्मक और रोचक तरीके से समझाने का सफल उदाहरण भी साबित हुआ. छात्राओं की ओर से कठपुतली के माध्यम से प्रस्तुत यह संदेश स्पष्ट करता है कि स्वस्थ शरीर और मानसिक संतुलन जीवन की सबसे बड़ी पूंजी हैं. —

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By KALENDRA PRATAP SINGH

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