ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) के आह्वान पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे एवं बिहार में उच्च शिक्षा पर सरकार के हमले के खिलाफ बीते 22 जुलाई को निकाले गए राजभवन मार्च पर पुलिसिया दमन एवं गिरफ्तारी के विरोध में संगठन ने 25 जुलाई को बिहार बंद का ऐलान किया है.
छात्र संगठन आइसा व युवा संगठन इंकलाबी नौजवान सभा (आरवाईए) ने बिहार के छात्र, युवाओं एवं न्यायपसंद नागरिकों से इस बिहार बंद को सफल बनाने की अपील की है.
लाठीचार्ज में सैकड़ों छात्र घायल
इंकलाबी नौजवान सभा के राज्य उपाध्यक्ष तारिक अनवर, आइसा नेता मो. शेरजहां व मुकेश कुमार ने संयुक्त रूप से कहा कि राजभवन मार्च के लिए निकले छात्रों पर पुलिस ने बर्बरतापूर्वक लाठीचार्ज किया, जिसमें सैकड़ों छात्र घायल हुए हैं.
उन्होंने आरोप लगाया कि एक तरफ पुलिसिया दमन किया जा रहा था, तो दूसरी तरफ आंदोलनकारी छात्रों को ही गिरफ्तार कर मुकदमे दर्ज किए गए और उन्हें जेल भेजा जा रहा है.
संगठन ने सरकार के समक्ष रखीं प्रमुख मांगें
इस आंदोलन के ज़रिए आइसा और आरवाईए के नेताओं ने सरकार के समक्ष अपनी निम्नलिखित मांगें प्रमुखता से रखी हैं:
- केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अविलंब इस्तीफा दें.
- एनटीए (NTA) को रद्द किया जाए और एनईपी (NEP) 2020 को वापस लिया जाए.
- गिरफ्तार किए गए सभी छात्रों को अविलंब रिहा किया जाए एवं उन पर दर्ज सभी एफआईआर वापस ली जाएं.
- पुलिसिया दमन पर रोक लगे और बर्बरता के जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों को तुरंत बर्खास्त किया जाए.
- 7.5 सीजीपीए (CGPA) की अनिवार्यता खत्म कर सभी को एक समान डिग्री दी जाए.
- यूजी को सरकार के अधीन कर विश्वविद्यालय की स्वायत्तता पर किए जा रहे हमले पर रोक लगाई जाए.
- बिहार विश्वविद्यालय अधिनियम 1976 को निरस्त करने का प्रस्ताव वापस लिया जाए.
- विश्वविद्यालयों एवं कॉलेजों में फीस वृद्धि पर पूरी तरह रोक लगाई जाए.
संगठन के नेताओं ने आम जनता व छात्रों से अपील की है कि 25 जुलाई के बिहार बंद के आह्वान को पूर्णतः लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से सफल बनाएं.
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