गया जी में आइसा-आरवाइए का बिहार बंद रहा असरदार, 3 घंटे तक थम गया मुख्य सड़कों पर यातायात

गया जी शहर में पेपर लीक प्रकरण के खिलाफ ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) और इंकलाबी नौजवान सभा (आरवाइए) द्वारा आहूत 'बिहार बंद' का खासा असर देखा गया. आंदोलनकारियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को जीत बताया, लेकिन शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग पर अडिग रहे.

पेपर लीक प्रकरण में सभी दोषियों पर सख्त कार्रवाई और अभ्यर्थियों की मांगों को लेकर शनिवार को ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) तथा इंकलाबी नौजवान सभा (आरवाइए) द्वारा आहूत 'बिहार बंद' का गया शहर में व्यापक असर देखने को मिला.

सुबह नौ बजे से दोपहर 12 बजे तक सैकड़ों की संख्या में बंद समर्थक सड़कों पर उतरे और दुकानदारों व वाहन चालकों से शांतिपूर्ण तरीके से बंद का समर्थन करने की अपील करते रहे.

गया कॉलेज से टावर चौक तक निकाला गया मार्च

बंद समर्थकों का काफिला गया कॉलेज से शुरू होकर रामपुर, गेवाल बिगहा, सरकारी बस पड़ाव, गांधी मैदान, राय काशीनाथ मोड़, डाक बंगला रोड, जीबी रोड, कोतवाली और केपी रोड होते हुए टावर चौक पहुंचा, जहां यह एक विशाल सभा में तब्दील हो गया. जुलूस गुजरने के दौरान शहर के मुख्य मार्गों पर करीब तीन घंटे तक यातायात व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित रही.

सुरक्षा के दृष्टिकोण से पुलिस जवानों की भारी तैनाती की गई थी. वहीं, विधि-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एसएसपी सुशील कुमार, सदर एसडीओ अनिल कुमार रमन सहित पुलिस व प्रशासन के वरीय अधिकारी क्षेत्र में गश्त करते रहे. बंद समर्थकों और जुलूस पर ड्रोन कैमरों से भी निगरानी रखी जा रही थी.

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा संघर्ष की जीत, लेकिन लड़ाई जारी रहेगी: तारिक अनवर

टावर चौक पर आयोजित सभा को संबोधित करते हुए इंकलाबी नौजवान सभा के राज्य उपाध्यक्ष तारिक अनवर, आइसा नेता मो. शेरजहां, शीतल कुमार, ट्विंकल रक्षिता, साबिर खान एवं गुलनाज ने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लाखों छात्र-युवाओं के अनवरत संघर्ष की ऐतिहासिक जीत है. हालांकि, नेताओं ने स्पष्ट किया कि जब तक पूरी शिक्षा व्यवस्था में सुधार नहीं होता, लड़ाई जारी रहेगी.

इस दौरान छात्र नेताओं ने एक-दूसरे को लड्डू खिलाकर शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की खबर पर खुशी जाहिर की.

मुकदमे वापस लेने और गिरफ्तार छात्रों की रिहाई की मांग

वक्ताओं ने आंदोलन के दौरान छात्र-युवाओं और छात्र नेताओं पर दर्ज किए गए मुकदमों को तुरंत वापस लेने तथा जेल में बंद छात्रों को अविलंब रिहा करने की मांग की. उन्होंने कहा कि सरकार दमनकारी नीतियों से छात्रों की आवाज को दबा नहीं सकती.

प्रदर्शन व बंद में मुकेश, मो. साकिब, अनुराग, शहरे आलम, मो. तारिक अनवर, शिशुपाल कुमार, नूर शेख, चितरंजन कुमार समेत सैकड़ों कार्यकर्ता और छात्र शामिल थे.

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By Niraj kumar

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