बचत सिखा रहे भिखारी

जितेंद्र मिश्र गया : बात 2013 की है. पटना से गया के मंगलागौरी मंदिर आये एक सज्जन ने यहां के भिखारियों को भीख न देकर एक सीख दी. जीवन के लिए वैकल्पिक राह खोजो. तब भिखारियों को उनकी बात बुरी लगी. लेकिन, बाद में अहसास हुआ कि बात उनके काम की थी. इसके बाद भिखारियों […]

जितेंद्र मिश्र
गया : बात 2013 की है. पटना से गया के मंगलागौरी मंदिर आये एक सज्जन ने यहां के भिखारियों को भीख न देकर एक सीख दी. जीवन के लिए वैकल्पिक राह खोजो. तब भिखारियों को उनकी बात बुरी लगी. लेकिन, बाद में अहसास हुआ कि बात उनके काम की थी. इसके बाद भिखारियों ने बैठक कर एक संगठन बनाया. तदर्थ समिति भी बनी. मंदिर की सीढ़ियों पर बैठनेवाले भिखारियों ने तय किया कि जो भी कमायेंगे उसमें से कुछ न कुछ जरूर बचायेंगे. बचत का भी नियम बनाया.
नियम के मुताबिक, मंदिर के पास भीख मांगनेवाला हर भिक्षुक सप्ताह में पांच रुपये कोषाध्यक्ष के पास जमा करेगा. कुछ दिनों में लगा कि बचत के लिहाज से पांच रुपये काफी कम हैं, तो राशि 10 रुपये कर दी. जो पैसे जमा हुए उससे मां मंगला बैंक नामक संस्था के नाम से मध्य बिहार ग्रामीण बैंक में तीन लोगों का संयुक्त खाता खुला. संस्था की अध्यक्ष हीरामती देवी के मुताबिक, इस खाते में फिलहाल करीब 50 हजार रुपये जमा हैं. संस्था की सचिव मालती देवी बताती हैं कि बैंक खाते में केवल पैसे जमा करना इनका उद्देश्य नहीं है.
इन पैसों से संस्था के सदस्यों की आर्थिक दिक्कतें दूर हों, इस पर ज्यादा बल दिया जाता है. इसलिए जब भी कोई सदस्य किसी संकट में होता है या कुछ नया करना चाहता है, उसे बैंक से पैसे निकाल कर लोन दिया जाता है. यह और बात है कि कर्ज लेनेवाले को बदले में ब्याज भी देना होता है.
34 लोगों को दी मदद
कोषाध्यक्ष नगीना देवी ने बताया कि बैंक खाते में जमा पैसे से 34 जरूरतमंद लोगों ने कर्ज लिया. कर्ज लेनेवाले को इस मदद के बदले दो प्रतिशत की दर से ब्याज लेने-देने का प्रावधान है. संगठन से कर्ज लेनेवाले सदस्य पैसे वापस भी कर रहे हैं.

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