गया : शहर में बसने की होड़ में लोग भविष्य की चिंता नहीं कर रहे हैं. यही नहीं नियमों का पालन करना भी उचित नहीं समझ रहे हैं. शहर के कई नये मुहल्ले में लोग इस तरह से मकान बनाया है कि वहां नाली-गली बनाने की जगह तक नहीं छोड़ी है. कई मुहल्लों में बरसात के दिनों में यहां के लोगों को भारी फजीहत का सामना करना पड़ता है.
जलजमाव व नाले का पानी जमा होने पर निगम को कोसा जाता है. निगम सूत्रों का मानें, तो शहर में मकान बनाने के लिए काम शुरू करने से पहले 20 प्रतिशत लोग ही नगर निगम से नक्शा पास करवाते हैं. इतना ही नहीं जिन लोगों को बैंक आदि से लोन लेना होता है वहीं निगम कार्यालय तक पहुंचते हैं. क्योंकि, लोन के लिए मकान का नक्शा पास होना अनिवार्य है.
वर्ष 2018 जनवरी से निगम में नक्शा पास कराने के लिए ऑनलाइन फॉर्म जमा कराया जा रहा है. इसके बाद भी शहर में मकान बनानेवाले लोग इसमें रुचि नहीं दिखा रहे हैं. इसका मुख्य कारण रहा है कि बिना नक्शा पास कराये बन रहे मकान के मालिकों पर अब तक निगम के अधिकारी कार्रवाई करने से परहेज करते रहे हैं. लोगों का कहना है कि भविष्य की चिंता किये बगैर ही बस रहे नये-नये मुहल्लों के कारण आनेवाले दिनों में शहर में बड़ी समस्या खड़ी हो सकती है.
पहले से बनी है टीम
नगर निगम में अनाधिकृत निर्माण के लिए टीम का गठन बहुत पहले ही किया गया है लेकिन, टीम में शामिल अधिकारियों को अब तक कभी भी अपनी जिम्मेदारी के प्रति सक्रिय नहीं देखा गया है. निगम कार्यालय की मानें, तो शहर के 53 वार्डों के लिए अलग-अलग लोगों को जिम्मेदारी दी गयी है.
इनमें अमीन, वार्ड में तैनात कनीय अभियंता, सहायक अभियंता व कार्यपालक अभियंता शामिल हैं. ऑनलाइन व्यवस्था से पहले नक्शा जांच आदि में अमीन का काम लिया जाता था. ऑनलाइन फॉर्म जमा होने के बाद अब अमीन को नक्शा पास करनेवाले काम से मुक्त कर दिया गया है. इसके बाद भी अनाधिकृत बनाये जा रहे मकानों की रिपोर्ट निगम कार्यालय में नहीं पहुंच पा रही है.
कुछ गलती लोगों की, तो निगम के अधिकारी भी कम नहीं : निगम से मकान का नक्शा पास कराने के लिए कुछ ही लोग ऐसे हैं जो जान-बूझ कर आवेदन नहीं करते हैं. जानकारों का कहना है कि ज्यादातर लोग निगम में परेशान किये जाने के कारण भी इस झंझट में नहीं पड़ना चाहते हैं. ऑनलाइन फॉर्म जमा करने पर पब्लिक को निगम कार्यालय बुलाने के लिए कुछ-न-कुछ त्रुटि निकाल कर सूचना दी जाती है.
इन त्रुटियों को दूर करने के लिए व परेशानी से बचने के लिए लोग कुछ ले-देकर काम चला लेते हैं. निगम सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार ऑनलाइन के 250 आवेदन अब तक लंबित हैं. करीब चार माह से एक भी नक्शे को पास नहीं किया गया है. पिछले दिनों स्टैंडिंग की बैठक में डूडा के कार्यपालक अभियंता द्वारा समय पर जांच नहीं किये जाने पर इसकी जिम्मेदारी जल व्यवस्था के प्रभारी कार्यपालक अभियंता राकेश कुमार सिंह को प्रभार देने का निर्णय लिया गया. इसके बाद व्यवस्था सुधार में कितनी पहल होती है आनेवाला समय ही बतायेगा.
की जायेगी कार्रवाई
शहर में बन रहे बिना नक्शा स्वीकृत कराये मकानों की जांच कर कार्रवाई करने का निर्देश दिया जा रहा है. मकान बनाने से पहले निगम से नक्शा पास कराना जरूरी होता है. ताकि रोड-नाली व अन्य सुविधाओं का समाधान पहले ही निकाल लिया जाये. शहर में बिना प्लानिंग के मकान बनाये जाने के कारण ही कई जगहों पर जलजमाव की समस्या सामने आती है. इन सब से निजात पाने के लिए हर किसी को सहयोग करना होगा.
