Darbhanga News: संस्कृत विश्वविद्यालय में कामकाज ठप, अनिश्चितकालीन हड़ताल पर गये कर्मचारी

Darbhanga News:कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय में मंगलवार को दिन भर कामकाज ठप रहा.

Darbhanga News: दरभंगा. कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय में मंगलवार को दिन भर कामकाज ठप रहा. इस दौरान विवि मुख्यालय के किसी कार्यालय में प्रदेशभर के संस्कृत कॉलेजों से आने वाले किसी भी शिक्षाकर्मियों अथवा छात्रों का कोई काम नहीं हुआ. पूरे कार्यावधि के दौरान विवि कर्मचारी संघ से जुड़े कर्मचारी उपस्थिति बनाकर डेरा डालो-घेरा डालो आंदोलन करते रहे. इनके समर्थन में पेंशनर समाज से जुड़े लोग भी थे. आंदोलन के दौरान कर्मचारियों एवं पेंशनधारियों ने धरना- प्रदर्शन के साथ सभा की.

आश्वासन देकर पीछे हट रहा विश्वविद्यालय

वक्ताओं ने मांगों के समर्थन में विचार रखा. विवि प्रशासन की मनमर्जी के खिलाफ नाराजगी व्यक्त की. कहा कि आंदोलन की पूर्व सूचना के बावजूद सक्षम पदाधिकारी विश्वविद्यालय में उपस्थित नहीं हैं. कर्मचारियों की मांगें पूरी करने के लिए विवि के अधिकारियों ने पहले भी कई बार वार्ता कर आश्वासन दिया था. बावजूद मांगें पूरी नहीं की गयी. अब, जब तक मांगें पूरी नहीं होगी, तब तक आंदोलन जारी रहेगा.

इन मांगों को लेकर कर्मचारी कर रहे आंदोलन

मांगों में एसीपी, एमएसीपी के बकाया राशि का भुगतान, सातवें पुनरीक्षित वेतन का एक अप्रैल 2019 से 31 जनवरी 2020 तक की अन्तर राशि 58 प्रतिशत का भुगतान, वर्धित डीए की अंतर राशि का भुगतान, वरीयता के आधार पर प्रशाखा पदाधिकारियों काे प्रभार देना, कर्मी को एक विभाग के अतिरिक्त प्रभार सौंपने पर रोक लगाने, शिक्षकेतर कर्मचारियों को प्रोन्नति देने, अनुकम्पा पर नियुक्ति करने, कार्यालय व्यवस्था में सुधार लाने, जेनेटर की व्यवस्था करने, शिक्षा व्यवस्था सुदृढ़ करने, विश्वविद्यालय भवन व भूखंड को कार्यालय कार्य के अतिरिक्त उपयोग नहीं करने आदि शामिल है. आंदोलन में डॉ रविंद्र मिश्रा, विवि अध्यक्ष डॉ अनिल कुमार झा, सचिव सुनील कुमार सिंह, उपाध्यक्ष राजेश कुमार झा, गोपाल कुमार उपाध्याय, संजय मिश्रा सहित सुशील कुमार झा, कुंदन कुमार भारद्वाज, रंजीत कुमार ठाकुर, अभिमन्यु कुमार, पेंशनर समाज के रघुनंदन लाल कर्ण आदि ने मांगों के समर्थन में विचार व्यक्त किया.

वार्ता में नहीं बनीं बात

प्रभारी कुलपति प्रो. दिलीप कुमार झा ने कर्मचारियों से वार्ता की, लेकिन बात नहीं बनीं. कर्मचारियों का कहना था कि विवि के जो अधिकारी वार्ता के बावजूद मांगें पूरी नहीं कर सकते, उन्हें पद पर बने रहने का कोई औचित्य नहीं है. ऐसी स्थिति में अधिकारियों को इस्तीफा दे देना चाहिए.

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Author: PRABHAT KUMAR

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