दरभंगा. शहर के ऐतिहासिक जल स्रोतों को बचाने और लोगों को उनके महत्व के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से चलाए जा रहे “तालाब बचाओ अभियान”के तहत शुक्रवार को हराही, दिग्घी और गंगासागर तालाबों का निरीक्षण किया गया. निरीक्षण में तालाबों की स्थिति को देखकर विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने गहरी चिंता व्यक्त की. तालाब बचाओ अभियान के अनुरोध पर सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता कमलेश कुमार मिश्र के नेतृत्व में कार्पस जूरिस इंडिया की लॉयर्स टीम की सदस्य श्वेता प्रिया एवं थोप्पानी संजीव ने तीनों झीलों का निरीक्षण किया. इस दौरान टीम के सदस्यों ने तीनों तालाबों की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय स्थिति पर सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों से विस्तृत जानकारी ली.
तालाब के सौंदर्यीकरण के नाम पर मनमानी सही नहीं
अधिवक्ता कमलेश कुमार मिश्र ने कहा कि कोई भी झील व तालाब के सौन्दर्यीकरण के नाम पर सरकार मनमानी नहीं कर सकती. इसके लिए स्पष्ट कानून, नियम और न्यायालयों के निर्देश मौजूद हैं, जिनका पालन अनिवार्य है. कहा कि हराही, दिग्घी और गंगासागर तालाबों से जुड़े मामलों को लेकर एक सप्ताह के भीतर सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की जायेगी. याचिका के प्रमुख आधारों में वर्ष 2022 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल, कोलकाता द्वारा गठित जांच समिति की अनुशंसाओं का पालन नहीं होना, एनजीटी दिल्ली के आदेश के आलोक में सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की ‘इंडिकेटिव गाइडलाइन्स’का उल्लंघन, इन तालाबों का नेशनल एटलस (इसरो) और बिहार स्टेट वेटलैंड अथॉरिटी की सूची में शामिल होना शामिल है. बताया गया कि वर्ष 2011 में जल संरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा बिहार सरकार को दिए गए निर्देशों की अनदेखी की गयी है. अधिवक्ताओं ने कहा कि वर्तमान सौन्दर्यीकरण परियोजना से इन तालाबों को अपूरणीय क्षति होने की आशंका है. इसे रोकना अत्यंत आवश्यक है.
