Darbhanga : धूप निकलने के बाद भी नहीं शुरू हुई गेहूं की थ्रेसिंग

लाके में गुरुवार को हुई बारिश के बाद शुक्रवार को गेहूं की कटनी व दौनी का काम पूरी तरह ठप रहा.

By DIGVIJAY SINGH | April 11, 2025 10:22 PM

Darbhanga : कमतौल. इलाके में गुरुवार को हुई बारिश के बाद शुक्रवार को गेहूं की कटनी व दौनी का काम पूरी तरह ठप रहा. हालांकि धूप निकलने पर किसानों ने राहत की सांस ली. भींग चुके गेहूं की फसल को सुखाने में जुटे रहे. कटी हुई गेहूं की फसल के लिए बारिश काफी नुकसानदायक बताया जा रहा है. अहियारी गोट के सुधीर महतो ने बताया कि सूखाड़ के कारण धान की फसल मारी गयी, इसके बाद किसानों की सारी उम्मीद गेहूं की पैदावार पर आकर टिक गयी थी. बोआई के बाद छुट्टा जंगली जानवरों से बचने के बाद फसल पककर तैयार हुई तो इंद्रदेव ने आसमान से आफत की बरसात कर उम्मीदों पर पानी फेर दिया. वहीं परिवार के साथ फसल सुखाने में जुटे फकीरचन महतो ने बताया कि पिछले कई सालों से प्रकृति किसानों का साथ नहीं दे रही है. खरीफ की फसल कम बरसात के कारण अच्छी नहीं होती तो रबी की फसल बेमौसम बारिश व ओला वृष्टि से चौपट हो जाती है. बड़े किसानों द्वारा रीपर व कंबाइन मशीन से फसल की कटाई करा दी जाती है. उनके जैसे किसानों द्वारा भूसा की लालच में खुद ही गेहूं की कटाई की जाती है व थ्रेसर के द्वारा फसल की दौनी कराई जाती है, जिससे पशुओं को खिलाने के लिए भूसा का भी प्रबंध हो जाए. इसी चक्कर में कटाई का काम पूरा होने के बाद भी गेहूं भींग गये. अब इसे सुखाने में पसीने छूट रहे हैं. वहीं हवा के झोंके से जिन किसानों की फसल गिर गई है, उसकी कटाई का काम और भी कठिन हो जाएगा. किसान राघवेंद्र ठाकुर, सुधीर ठाकुर, मोहन महतो, गिरबल महतो आदि ने बताया कि किसान की कमर टूट गयी है. कटी फसल को दोबारा सुखाने में अतिरिक्त मेहनत के अलावे मजदूरी खर्च करनी पड़ रही है. पहले फसल काटने के पैसे देने पड़े. अब सुखाने की मजदूरी का अतिरिक्त बोझ भी पड़ेगा. इस तरह किसानों को दोहरी आर्थिक मार झेलनी पड़ रही है.

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