UPI charges: दरभंगा में यूपीआइ (UPI) लेनदेन पर संभावित शुल्क को लेकर व्यापारिक जगत में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है. इसे लेकर चैंबर ऑफ कॉमर्स दरभंगा की एक आवश्यक बैठक आयोजित की गई, जिसमें सरकार के इस कदम की कड़ी निंदा की गई. बैठक में शामिल सभी पदाधिकारियों ने एक स्वर में कहा कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था को बढ़ावा देने के बाद अब इस पर किसी भी प्रकार का शुल्क लगाना देश के व्यापारियों और आम उपभोक्ताओं के साथ सरासर अन्याय है.
digital payment charges rollback: व्यापारियों पर दोहरी मार है यूपीआइ शुल्क का प्रस्ताव
चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष पवन कुमार सुरेका और प्रधान सचिव सुशील कुमार जैन ने संयुक्त रूप से कहा कि यूपीआइ पर शुल्क लगाना व्यापार जगत पर दोहरी मार के समान है. एक तरफ सरकार डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ ऐसे शुल्क थोपकर डिजिटल ट्रांजैक्शन को हतोत्साहित किया जा रहा है, जिससे छोटे दुकानदारों और कारोबारियों की मुश्किलें काफी बढ़ जाएंगी.
डिजिटल अर्थव्यवस्था में सहयोग के बाद शुल्क लगाना गलत
बैठक के दौरान सचिव अभिषेक चौधरी और कोषाध्यक्ष मुकेश खेतान ने कहा कि जब देश के व्यापारियों ने अपनी सूझबूझ और मेहनत से डिजिटल अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में सरकार का पूरा सहयोग किया है, तो अब इस पर आर्थिक बोझ डालना पूरी तरह से तर्कहीन है. यह फैसला पूरी तरह से जनविरोधी और व्यापारी विरोधी है, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता है.
प्रमुख नेताओं और मंत्रियों को भेजा गया विरोध पत्र
चैंबर के संरक्षक अजय कुमार पोद्दार, विनोद कुमार साह और श्री कृष्ण देव शाह ने बताया कि इस गंभीर मुद्दे को लेकर देश के वित्त मंत्री, भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय व प्रांतीय अध्यक्ष, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और वरिष्ठ नेता संजय झा को ज्ञापन सौंपा गया है. संगठन ने इन सभी शीर्ष नेताओं से इस प्रस्ताव को तुरंत प्रभाव से वापस लेने की जोरदार मांग की है.
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