Darbhanga News: पहले करते थे निर्यात, आज दूसरे जगह के गुड़ का आसरा

Darbhanga News:कभी गुड़ उद्योग के लिए आत्मनिर्भर माने जाने वाले मिथिला के ग्रामीण क्षेत्रों में अब आस्था के महापर्व छठ पर भी भगवान भास्कर को अर्घ देने के लिए लोगों को यूपी के गुड़ पर ही निर्भर रहना पड़ रहा है.

Darbhanga News: बेनीपुर. कभी गुड़ उद्योग के लिए आत्मनिर्भर माने जाने वाले मिथिला के ग्रामीण क्षेत्रों में अब आस्था के महापर्व छठ पर भी भगवान भास्कर को अर्घ देने के लिए लोगों को यूपी के गुड़ पर ही निर्भर रहना पड़ रहा है. स्थानीय स्तर पर गन्ना की खेती बंद होने व गुड़ उद्योग समाप्त हो जाने के कारण अन्य प्रदेश से गुड़ की आवक होने लगी है. इससे गुड़ के दामों में काफी वृद्धि हो गयी है. विदित हो कि आस्था के महापर्व छठ के सभी सामान गुड़ से ही बनता है, इसलिए इस पर्व में गुड़ की मांग अधिक बढ़ जाती है. शनिवार को बेनीपुर बाजार मे खरना व अर्घ के लिए गुड़ की खरीदारी करते वॄद्ध अमरकान्त झा ने बीते जमाने की याद दिलाते हुए बताया कि एक जमाना था, जब छठ पर्व के लिए अधिकांश लोग अपने दरवाजे पर कल्हुआर लगा गुड़ तैयार करते थे, जो शुद्धता का प्रतीक माना जाता था. अब मिथिला ही क्या, शायद पूरे बिहार में ईंख की खेती नहीं होती है. इसे लेकर गुड़ उद्योग बंद हो गया. मजबूरन अब बाजार के गुड़ पर ही निर्भर होना पड़ता है. ज्ञात हो कि पूर्व मे यहां के बहुतायत किसान ईंख की खेती किया करते थे. गांव-गांव दर्जनों गुड़ उद्योग निजी स्तर पर चलता था. ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को शुद्ध व स्वच्छ गुड़ उपलब्ध हुआ करता था. अब व्यापारी उत्तर प्रदेश से गुड़ का आयात करने लगे हैं. इस बार छठ पर्व पर बाजार में यूपी निर्मित गुड़ों की खुब बिक्री हो रही है. परिणाम स्वरूप इस बार गुड़ 65 से 70 किलो प्रति किलो बिक रही है. लोगों ने कहा कि बजार में उपलब्ध यूपी निर्मित गुड़ मे पैसा तो अधिक लग रहा ही है, परंतु मिथिला की गुड़ की मिठास इसमें कहां से आयेगी.

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Author: PRABHAT KUMAR

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