जल संसाधन बचाकर करें मखाना की खेती, तभी होगा टिकाऊ विकास

मखाना की खेती आर्थिक रूप से फायदेमंद हो सकती है, लेकिन इसे केवल वहीं किया जाना चाहिए जहां पर्याप्त सतही जल उपलब्ध हो. डॉ. मनोज कुमार ने किसानों को भूजल के अत्यधिक दोहन से बचने और जल संरक्षण के साथ खेती करने की सलाह दी है.

Makhana Cultivation: राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. मनोज कुमार ने कहा है कि मखाना की खेती आर्थिक रूप से काफी लाभकारी है, लेकिन इसका विस्तार केवल उन्हीं क्षेत्रों में किया जाना चाहिए जहां पर्याप्त सतही जल संसाधन उपलब्ध हो. भूजल के अत्यधिक दोहन के सहारे मखाना की खेती भविष्य में पेयजल संकट को और गंभीर बना सकती है. उन्होंने यह बातें असम के गोलपाड़ा जिले के कल्याणपुर पंचायत के 50 किसानों तथा कृषि विज्ञान केंद्र, परसौनी (पूर्वी चंपारण) के 50 किसानों के लिए आयोजित ऑनलाइन वैज्ञानिक प्रशिक्षण कार्यक्रम में कहीं.

असम और पूर्वी चंपारण के किसानों को मिला ऑनलाइन प्रशिक्षण

डॉ. कुमार ने बताया कि असम में जल संसाधन की अच्छी उपलब्धता के कारण वहां मखाना उत्पादन और इसके क्षेत्र विस्तार की काफी संभावनाएं हैं. उन्होंने किसानों को मखाना उत्पादन, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और निर्यात तक की पूरी वैज्ञानिक प्रक्रिया की जानकारी दी [cite: जल संसाधन बचाकर करें मखाना की खेती, तभी होगा टिकाऊ विकासजहां पर्याप्त सतही जल उपलब्ध हो, वहां करें खेती : डॉ. मनोज कुमार]. साथ ही यह भी बताया कि इससे पहले भी असम के छह जिलों के किसानों को राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र में प्रशिक्षण दिया जा चुका है. गोलपाड़ा के डीएफओ तेजस मरिस्वामी के संयोजन में आयोजित इस कार्यक्रम में गोलपाड़ा पश्चिम के विधायक पवित्र राबा ने राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र के सहयोग की सराहना की और स्थानीय किसानों के लिए आगे भी तकनीकी मार्गदर्शन की अपेक्षा जताई.

भूजल के अत्यधिक दोहन से बचने की सख्त सलाह

पूर्वी चंपारण के किसानों को संबोधित करते हुए डॉ. मनोज कुमार ने कहा कि मखाना एक जलीय फसल है और इसकी सफलता पर्याप्त जल उपलब्धता पर पूरी तरह निर्भर करती है [cite: जल संसाधन बचाकर करें मखाना की खेती, तभी होगा टिकाऊ विकासजहां पर्याप्त सतही जल उपलब्ध हो, वहां करें खेती : डॉ. मनोज कुमार]. उन्होंने उत्तर बिहार में घटती वर्षा, गिरते भूजल स्तर और बढ़ते पेयजल संकट पर गहरी चिंता व्यक्त की [cite: जल संसाधन बचाकर करें मखाना की खेती, तभी होगा टिकाऊ विकासजहां पर्याप्त सतही जल उपलब्ध हो, वहां करें खेती : डॉ. मनोज कुमार]. उन्होंने किसानों को सलाह दी कि मखाना की खेती शुरू करने से पहले यह सुनिश्चित करें कि इसके लिए भूजल का अत्यधिक दोहन न हो [cite: जल संसाधन बचाकर करें मखाना की खेती, तभी होगा टिकाऊ विकासजहां पर्याप्त सतही जल उपलब्ध हो, वहां करें खेती : डॉ. मनोज कुमार]. जल संरक्षण के साथ की गई मखाना की खेती ही किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ भविष्य की जल सुरक्षा भी सुनिश्चित कर सकती है.


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By Ashok kumar jha

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