Darbhanga News: डिजिटल तकनीक के बढ़ते उपयोग और ऑनलाइन सेवाओं के विस्तार का असर अब स्टेशनरी कारोबार पर भी साफ दिखाई देने लगा है. कभी ग्रीटिंग कार्ड, निमंत्रण पत्र और शुभकामना संदेशों की बिक्री से गुलजार रहने वाली स्टेशनरी दुकानों पर अब ग्राहकों की संख्या लगातार घट रही है.
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ऑनलाइन शुभकामनाओं ने घटाई ग्रीटिंग कार्ड की मांग
पहले नव वर्ष, जन्मदिन, विवाह और अन्य शुभ अवसरों पर लोग ग्रीटिंग कार्ड और शुभकामना संदेश खरीदने के लिए स्टेशनरी दुकानों पर पहुंचते थे. अब मोबाइल, सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए कुछ ही सेकेंड में शुभकामनाएं भेजी जा रही हैं. इसका सीधा असर ग्रीटिंग कार्ड और अन्य स्टेशनरी उत्पादों की बिक्री पर पड़ा है.
पेपरलेस व्यवस्था से भी कम हुई मांग
सरकारी और निजी संस्थानों में तेजी से लागू हो रही पेन-पेपरलेस व्यवस्था के कारण कागज और अन्य स्टेशनरी सामग्री की खपत भी लगातार घट रही है. कई कार्यालयों में अब अधिकांश काम डिजिटल माध्यम से किए जा रहे हैं.
स्कूलों की नई व्यवस्था से खुदरा दुकानों पर असर
कारोबारियों का कहना है कि निजी स्कूल अब पुस्तक, कॉपी, कवर, स्लेट, पेंसिल और अन्य शैक्षणिक सामग्री सीधे विद्यार्थियों को उपलब्ध करा रहे हैं. वहीं सरकारी विद्यालयों में भी उपस्थिति पंजी, पाठ्यपुस्तक और इंस्ट्रूमेंट बॉक्स जैसी सामग्री एजेंसियों के माध्यम से वितरित की जा रही है. इससे स्थानीय खुदरा स्टेशनरी दुकानों की बिक्री में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है.
दूसरे कारोबार की ओर बढ़ रहे छोटे दुकानदार
स्टेशनरी व्यवसायी अनवर, रामबालक सिंह, विवेक चौधरी, संजय महतो, अंसार, जितेंद्र झा और शंभु दास ने बताया कि पहले सालभर कारोबार चलता था, लेकिन अब ग्राहकों की संख्या काफी कम हो गई है. उनका कहना है कि मौजूदा हालात को देखते हुए कई छोटे दुकानदार स्टेशनरी कारोबार छोड़कर दूसरे व्यवसाय की ओर रुख करने की तैयारी कर रहे हैं.
कारोबारियों का मानना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाले समय में छोटे स्टेशनरी व्यवसाय को बचाए रखना बड़ी चुनौती बन जाएगा.
