दरभंगा: अवैध नर्सिंग होम छापेमारी के बाद आरोपियों को छोड़ने पर उठे सवाल, स्वास्थ्य मंत्री से फिर शिकायत की तैयारी

सुपौल बाजार में अवैध नर्सिंग होम और क्लिनिकों पर हुई छापेमारी के बाद शिकायतकर्ता ने स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं. रंगे हाथ पकड़े गए लोगों को छोड़ने और एफआईआर नहीं होने पर नाराजगी जताते हुए स्वास्थ्य मंत्री से दोबारा शिकायत करने की बात कही गई है. पढ़ें पूरी खबर…

दरभंगा के बिरौल से शंकर सहनी की रिपोर्ट

Darbhanga News: स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार के निर्देश और डीएम के आदेश पर गठित टीम द्वारा सुपौल बाजार में अवैध रूप से संचालित नर्सिंग होम, निजी क्लिनिक और जांच घरों पर की गई छापेमारी के बाद अब कार्रवाई को लेकर सवाल उठने लगे हैं. शिकायतकर्ता चन्द्र विजय साहू ने आरोप लगाया है कि रंगे हाथ पकड़े गए लोगों को छोड़ देना पूरी कार्रवाई पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है.

शिकायतकर्ता ने उठाए गंभीर सवाल

चन्द्र विजय साहू ने कहा कि छापेमारी के दौरान तीन लोगों को बिना डिग्री और प्रशिक्षण के मरीजों का इलाज करते पकड़ा गया था. इसके बावजूद उन्हें केवल चेतावनी देकर छोड़ दिया गया. उन्होंने सवाल उठाया कि जब लोग रंगे हाथ पकड़े गए थे तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं की गई.

उन्होंने कहा कि अस्पतालों के कुछ हिस्सों को सील कर केवल खानापूर्ति की गई है. इस मामले की दोबारा स्वास्थ्य मंत्री से लिखित शिकायत की जाएगी.

छापेमारी के अगले दिन फिर खुले कई प्रतिष्ठान

शिकायतकर्ता का कहना है कि छापेमारी की सूचना मिलते ही अधिकांश निजी क्लिनिक, नर्सिंग होम और जांच घर संचालक ताला बंद कर फरार हो गए थे. लेकिन अगले ही दिन कई प्रतिष्ठान फिर से खुले दिखाई दिए. इससे कार्रवाई की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े हो रहे हैं.

बिना रजिस्ट्रेशन वाले अस्पताल पर भी सवाल

चन्द्र विजय साहू ने कहा कि जेके कॉलेज स्थित जिस हड्डी अस्पताल में टीम ने छापेमारी की थी, उसका रजिस्ट्रेशन भी नहीं था. ऐसे में उसके विरुद्ध क्या कार्रवाई की गई, इसकी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए. उन्होंने मांग की कि बिना डिग्री और प्रशिक्षण के मरीजों का इलाज करने वाले सभी लोगों पर प्राथमिकी दर्ज होनी चाहिए.

छापेमारी में क्या मिला था

गौरतलब है कि शनिवार को गठित टीम ने खोरा गाछी रोड स्थित एसएस हॉस्पिटल में संतोष कुमार को डॉक्टर के बदले अल्ट्रासाउंड करते पकड़ा था. वहीं अरमान अंसारी बिना डिग्री ब्लड कलेक्शन कर रहा था.

इसके अलावा जेके कॉलेज स्थित एक निजी हड्डी अस्पताल में जोवैर अली बिना प्रशिक्षण के मरीजों की ड्रेसिंग कर रहा था. जांच के दौरान एक बच्चे के टूटे हाथ में प्लास्टर किए जाने की बात भी सामने आई थी, जिसकी जानकारी मरीज के परिजनों ने टीम को दी थी.

अस्पताल सील, लेकिन आरोपी मुक्त

छापेमारी टीम ने एक अस्पताल में अल्ट्रासाउंड कक्ष और दूसरे अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर (ओटी) को सील कर दिया था. हालांकि मौके पर पकड़े गए तीनों व्यक्तियों को चेतावनी देकर छोड़ दिया गया.

उच्चस्तरीय जांच और एफआईआर की मांग

अनुमंडलीय अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. योगेंद्र प्रसाद ने बताया था कि जांच रिपोर्ट सिविल सर्जन को सौंपी जाएगी. अब शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है.

स्थानीय लोगों ने भी कहा है कि बिना योग्य चिकित्सकों के इलाज करने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि मरीजों की जान से खिलवाड़ और आर्थिक शोषण पर रोक लग सके.

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By Sarfaraz Ahmad

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