दरभंगा): जाले नगर परिषद क्षेत्र के खेसर गांव में जलनिकासी की बदहाल व्यवस्था और लंबे समय से जारी जलभराव की समस्या के खिलाफ बुधवार को स्थानीय नागरिकों का आक्रोश भड़क उठा. नाराज लोगों ने नगर प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए जाले-घोघराहा मुख्य मार्ग पर बांस-बल्ले लगा दिए और जमा पानी के बीच आग जलाकर आवागमन पूरी तरह ठप कर दिया. सड़क जाम होने के चलते मुख्य मार्ग के दोनों ओर भारी वाहनों, यात्री बसों, ट्रकों और दोपहिया वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, जिससे राहगीरों व यात्रियों को घंटों भीषण परेशानी का सामना करना पड़ा.
सड़क पर बांस-बल्ले लगाकर आवागमन ठप, घंटों फंसे रहे वाहन
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि जलनिकासी का उचित प्रबंध न होने से खेसर इलाके में गंदा पानी सड़कों पर फैला रहता है. घरों से निकलना दूभर हो गया है और संक्रामक बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा है. आक्रोशित ग्रामीणों ने सड़क के बीचों-बीच बांस-बल्ले बांधकर वाहनों के पहिए पूरी तरह रोक दिए. स्थिति बिगड़ती देख स्थानीय लोगों ने सड़क पर जमा गंदे पानी के बीच लकड़ी रखकर आग जला दी और प्रशासनिक अनदेखी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की.
डायल-112 और जाले थाना की पुलिस मौके पर पहुंची
सड़क जाम और हंगामे की सूचना मिलते ही जाले थानाध्यक्ष संदीप कुमार पाल एवं डायल-112 की आपातकालीन पुलिस टीम तुरंत घटनास्थल पर पहुंची. पुलिस पदाधिकारियों ने उत्तेजित भीड़ को समझाने और यातायात बहाल कराने का प्रयास किया, लेकिन प्रदर्शनकारी बिना किसी ठोस और लिखित आश्वासन के हटने को तैयार नहीं हुए. ग्रामीण स्पष्ट रूप से जलजमाव के स्थायी निदान और नाला निर्माण की मांग पर अड़े रहे.
ईओ सुंदरम सानंद ने जेसीबी व सक्शन टैंक के साथ संभाला मोर्चा
विवाद बढ़ता देख नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी सुंदरम सानंद दलबल, जेसीबी मशीन और सक्शन टैंक लेकर मौके पर पहुंचे. थानाध्यक्ष संदीप कुमार पाल की मौजूदगी में कार्यपालक पदाधिकारी ने प्रदर्शनकारी ग्रामीणों से सीधी वार्ता की. उन्होंने नगर परिषद की ओर से तत्काल प्रभाव से सक्शन टैंक व जेसीबी के माध्यम से जलजमाव वाले स्थानों से पानी निकालने का काम शुरू कराया और जल्द ही जलनिकासी की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने का आधिकारिक भरोसा दिलाया. अधिकारियों के ठोस आश्वासन के बाद लोग शांत हुए और बांस-बल्ले हटाकर जाम समाप्त किया गया.
स्थायी नाला निर्माण तक बनी रहेगी समस्या: ग्रामीण
जाम समाप्त होने के बाद जाले-घोघराहा मुख्य मार्ग पर यातायात तो सामान्य हो गया, लेकिन स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह केवल एक अस्थायी राहत है. ग्रामीणों ने दो टूक कहा कि जब तक खेसर क्षेत्र से मुख्य जलस्रोत तक स्थायी पक्के नाले का निर्माण नहीं कराया जाता, तब तक हल्की बारिश में भी यह समस्या जस की तस बनी रहेगी. लोगों ने चेतावनी दी कि यदि स्थायी समाधान पर शीघ्र काम शुरू नहीं हुआ तो वे भविष्य में व्यापक आंदोलन के लिए विवश होंगे.
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