Darbhanga News: कुलाधिपति सचिवालय ने राज्य के सभी विश्वविद्यालयों एवं उनके अंगीभूत कॉलेजों में कार्यरत शिक्षकों के स्थानांतरण को लेकर नई गाइडलाइन जारी की है. अतिरिक्त मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह की ओर से 16 जून को जारी निर्देश में सभी कुलपतियों को स्थानांतरण प्रक्रिया में पारदर्शिता, एकरूपता और शैक्षणिक निरंतरता सुनिश्चित करने को कहा गया है.
वर्ष में केवल एक बार होगा स्थानांतरण
नई गाइडलाइन के अनुसार शिक्षकों का स्थानांतरण सामान्यतः वर्ष में केवल एक बार किया जाएगा. यह प्रक्रिया नियमित या पूरे शैक्षणिक सत्र के दौरान नहीं चलेगी. स्थानांतरण का कार्य सामान्यतः जून माह में ग्रीष्मावकाश के दौरान किया जाएगा, ताकि पढ़ाई, परीक्षाओं और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े.
विशेष परिस्थितियों में ही मिलेगा स्थानांतरण
निर्देश में कहा गया है कि जून के अलावा किसी अन्य समय स्थानांतरण केवल असाधारण, अपरिहार्य, आपातकालीन अथवा मानवीय आधार वाले मामलों में ही किया जा सकेगा. ऐसे मामलों में कुलाधिपति सचिवालय की पूर्व स्वीकृति अनिवार्य होगी और विस्तृत औचित्य के साथ अनुशंसा प्रस्तुत करनी होगी. सामान्य मानकों से अलग स्थानांतरण केवल अत्यंत मानवीय परिस्थितियों में कुलाधिपति की अनुमति से ही संभव होगा. हालांकि, पहले से लंबित सहानुभूतिपूर्ण स्थानांतरण मामलों का निपटारा प्रचलित नियमों के अनुसार जारी रहेगा.
कानून और शैक्षणिक जरूरतों के आधार पर होंगे तबादले
गाइडलाइन में स्पष्ट किया गया है कि सभी स्थानांतरण बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम, 1976, संबंधित अधिनियमों तथा सक्षम प्राधिकार द्वारा समय-समय पर जारी निर्देशों के अनुरूप किए जाएंगे. स्थानांतरण का आधार संस्थानों की आवश्यकता, स्वीकृत पदों की उपलब्धता, विषयवार शिक्षकों का संतुलित वितरण, आरक्षण एवं रोस्टर व्यवस्था, छात्र संख्या और शैक्षणिक आवश्यकताएं होंगी.
मनमानी और पक्षपात पर रोक लगाने के निर्देश
कुलाधिपति सचिवालय ने विश्वविद्यालयों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि स्थानांतरण प्रक्रिया किसी भी प्रकार की मनमानी, व्यक्तिगत पक्षपात या प्रतिशोध की भावना से प्रभावित न हो. साथ ही यह भी कहा गया है कि किसी शिक्षक के स्थानांतरण से संबंधित या स्थानांतरित होने वाले संस्थान में शिक्षण व्यवस्था, छात्र-शिक्षक अनुपात, मान्यता (एक्रेडिटेशन) संबंधी आवश्यकताओं और विद्यार्थियों के शैक्षणिक हितों पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए. सभी कुलपतियों को इन दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं.
