LNMU Hindi Exam: 75% सवाल सिलेबस से बाहर? चौथे सेमेस्टर के प्रश्नपत्र पर छात्रों ने उठाए गंभीर सवाल

लनामिवि के स्नातक चौथे सेमेस्टर की हिंदी परीक्षा में 75 प्रतिशत प्रश्न पाठ्यक्रम से बाहर पूछे गए, छात्रों में भारी आक्रोश और परीक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल।

LNMU हिंदी परीक्षा: ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय (LNMU) के स्नातक चौथे सेमेस्टर (सत्र 2024-28) की हिंदी मेजर परीक्षा का प्रश्नपत्र विवादों में घिर गया है. हिंदी मेजर के पांचवें पत्र ‘छायावादोत्तर हिंदी कविता’ की परीक्षा में परीक्षार्थियों ने आरोप लगाया है कि 20 में से करीब 15 प्रश्न निर्धारित पाठ्यक्रम से बाहर के पूछे गए. छात्रों का कहना है कि नौ चयनित कवियों और उनकी निर्धारित कविताओं के बजाय प्रश्नपत्र में छायावाद काल, गैर-पाठ्यक्रम कवियों और अन्य विषयों से सवाल पूछे गए.

20 में सिर्फ पांच प्रश्न सिलेबस से होने का दावा

परीक्षार्थियों के मुताबिक वस्तुनिष्ठ, लघुउत्तरीय और दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों को मिलाकर कुल 20 सवाल थे. इनमें केवल पांच प्रश्न ही निर्धारित पाठ्यक्रम से जुड़े थे. छात्रों का कहना है कि यदि प्रश्नपत्र में इतनी बड़ी संख्या में आउट ऑफ सिलेबस सवाल हैं, तो इसका सीधा असर उनकी तैयारी और परीक्षा परिणाम पर पड़ सकता है.

वस्तुनिष्ठ खंड में आठ सवाल आउट ऑफ सिलेबस

खंड-अ में 10 वस्तुनिष्ठ प्रश्न पूछे गए थे. छात्रों के अनुसार इनमें केवल दो सवाल पाठ्यक्रम से संबंधित थे, जबकि आठ सवाल बाहर के विषयों से जुड़े थे. विद्यार्थियों का आरोप है कि सभी प्रश्न दो-दो अंकों के थे और मुख्य रूप से कवियों के नाम पहचानने पर आधारित थे.

लघुउत्तरीय खंड में भी स्थिति नहीं बदली

खंड-ब में पांच लघुउत्तरीय प्रश्न पूछे गए, जिनमें से चार का उत्तर देना था. प्रत्येक प्रश्न पांच अंकों का था. परीक्षार्थियों के अनुसार इस पूरे खंड में केवल एक प्रश्न निर्धारित सिलेबस के अनुरूप था. बाकी प्रश्न गैर-पाठ्यक्रम विषयों से पूछे गए.

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों पर भी सवाल

खंड-स में 10-10 अंकों के पांच दीर्घ उत्तरीय प्रश्न थे, जिनमें से तीन का उत्तर देना था. छात्रों के मुताबिक इनमें ‘ख’ और ‘ग’ प्रश्न पाठ्यक्रम आधारित थे, जबकि ‘क’, ‘घ’ और ‘ड’ सवाल सिलेबस से बाहर के विषयों पर आधारित थे.

छात्रों ने विशेषज्ञ समिति से जांच की मांग की

परीक्षार्थियों का कहना है कि प्रश्नपत्र तैयार करने में यदि गलती हुई है, तो उसका खामियाजा विद्यार्थियों को नहीं भुगतना चाहिए. उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से प्रश्नपत्र की विशेषज्ञ समिति से जांच कराने और आउट ऑफ सिलेबस प्रश्नों के लिए सभी परीक्षार्थियों के हित में स्पष्ट अंक देने की नीति घोषित करने की मांग की है.

क्या कहते हैं विभागाध्यक्ष?

पीजी हिंदी विभाग के अध्यक्ष प्रो. उमेश कुमार ने कहा कि उन्होंने जारी प्रश्नपत्र को अभी ढंग से नहीं देखा है. उन्होंने कहा कि सभी प्रश्न सिलेबस के अनुरूप ही होने चाहिए.

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By Pravin kumar chou

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