Darbhanga News: फिजा में मिठास घोलती रही गुड़ की चाशनी, तिल की सोंधी खुशबू से सुवासित होता रहा वातावरण
Darbhanga News:प्रकृति में होनेवाले बदलाव के अनुरूप खुद को तैयार करने व नई पीढ़ी को बुजुर्गों की सेवा का संदेश देनेवाला महत्वपूर्ण पर्व मकरसंक्रांति की तैयारी पूरी कर ली गई है.
Darbhanga News: दरभंगा. प्रकृति में होनेवाले बदलाव के अनुरूप खुद को तैयार करने व नई पीढ़ी को बुजुर्गों की सेवा का संदेश देनेवाला महत्वपूर्ण पर्व मकरसंक्रांति की तैयारी पूरी कर ली गई है. बुधवार को अहले सुबह पुण्य स्नान कर श्रद्धालु अपने आराध्य को तिल, गुड़ एवं भिगोए हुए अरवा चावल का प्रसाद अर्पित करेंगे. इसके पश्चात यह प्रसाद उम्र में अपने से छोटे विशेष कर नई पीढ़ी के बच्चों को देते हुए वृद्धावस्था में आवश्यकता पड़ने पर सेवा का वचन लेंगे. इसको लेकर बच्चों का उत्साह एक दिन पूर्व ही चरम पर नजर आया. मंगलवार को दिन का भोजन आदि बनाकर महिलाएं लाइ, तिलवा आदि बनाने की तैयारी में जुट गई. तिल की सोंधी खुशबू के साथ गुड़ की चासनी की मिठास वातावरण को सुवासित कर उठी. हालांकि शहरी क्षेत्र में बड़ी संख्या में लोगों ने रेडीमेड लाइ एवं तिलकुट की खरीदारी त्यौहार के लिए की, लिहाजा दुकानों पर देर शाम तक खरीदारों का जमघट लगा रहा.
आरंभ हो जायेगा शुभकाल
मकर संक्रांति पर्व शास्त्रीय मातानुसार भी काफी महत्वपूर्ण है. प्रत्यक्ष देवता सूर्य दक्षिणायण से उत्तरायण होंगे. इसके साथ ही शुभकाल भी शुरू हो जायेगा. मिथिला में पिछले करीब एक माह से बंद पड़े शुभ कार्य मकर संक्रांति के अगले दिन से ही आरंभ हो जाएंगे. इस दिन पवित्र नदी एवं जलाशय में पूर्ण स्नान करने का विशेष फल कहा गया है. बड़ी संख्या में लोग जहां गंगासागर स्नान के लिए जाते हैं वही सैकड़ो श्रद्धालु सिमरिया में गंगा डूब देते हैं. कमला, जीवछ, त्रिमुहानी आदि स्थलों पर भी लोग पूर्ण स्नान के लिए पहुंचते हैं.
बच्चों का मचलता रहा जी
गुड़ की मिठास के साथ कुरकुरे तिल, मुरही व चूरा के लाइ संग दही व विभिन्न व्यंजन को मिलाकर तैयार स्वादिष्ट खिचड़ी का स्वाद लेने के लिए एक दिन पूर्व से ही बच्चों का जी मचलता रहा. बता दें कि इस अवसर पर दिन में चूरा-दही व लाइ आदि खाने की परंपरा है तो रात में खिचड़ी, तरुआ आदि खाने का चलन है.
गर्म तासीर वाले खाद्य पदार्थ ग्रहण करने की परंपरा
मकर संक्रांति पूर्व कई मायने में खास है. यह प्रकृति के साहचर्य का संदेश देता है. विज्ञान के अनुसार मौसम में होनेवाले परिवर्त्तन के अनुरूप शरीर को तैयार करना जरूरी होता है. मकर संक्रांति के दिन से दिन बड़ी व रातें छोटी होनी आरंभ हो जाती है. सूर्य के उत्तरायण होने की वजह से गर्मी बढ़नी शुरू हो जाती है. इस के अनुरूप शरीर को तैयार करने के लिए ही इस पर्व के मौके पर तिल, गुड़, चूरा, दही, मुरही, खिचड़ी आदि गर्म तासीर वाले खाद्य पदार्थ ग्रहण करने की परंपरा बनायी गयी है.
श्रद्धालु करेंगे दान
इस पर्व में दान की प्रधानता है. लोग अपनी क्षमता के अनुसार दान करते हैं. विभिन्न तरह की लाइ के अलावा खिचड़ी दान किया जाता है. गरीबों के बीच गर्म कपड़े भी दान करने की परंपरा है. इसकी तैयारी पूरी कर ली गयी है. मकर संक्रांति के दिन श्यामाधाम से लेकर दरभंगा जंक्शन के समीप शनिदेव मंदिर, लहेरियासराय महावीर मंदिर आदि स्थानों पर बड़ी संख्या में लोग दान करने पहुंचेंगे.
पांच तरह से तिल के प्रयोग का विधान
मकर संक्रांति में तिल की प्रधानता है. यही वजह है कि इसे मिथिला में तिला संक्रांति या तिल संक्रांति भी कहा जाता है. शास्त्रों में इस तिथि का विशेष महत्व बताया गया है. इस दिन पूजन-दान करने के साथ पुण्य स्नान करने का विधान है. मान्यता है कि पुण्य स्नान करने से मनोवांक्षित फल की प्राप्ति होती है. ईश्वर का आशीर्वाद प्राप्त होता है. इस अवसर पर तिल के पांच तरह से प्रयोग का विधान शास्त्रों में किया गया है. विश्वविद्यालय पंचांग के संपादक सह संस्कृत विवि के पूर्व कुलपति पं. रामचंद्र झा बताते हैं कि इस अवसर पर पांच तरह से तिल का प्रयोग करना चाहिए. तिल स्नान, तिल पूजन, तिल से हवन, तिल दान व तिल ग्रहण करने का विधान है.
ब्रह्म मुहूर्त से पुण्य काल
संक्रांति में तिथि का कोई महत्व नहीं होता. ज्योतिषविद् पं विश्वनाथ शास्त्री बताते हैं कि संक्रांति एकादशी, द्वादशी या फिर किसी भी तिथि को हो सकता है. इसमें अधपहरा का भी कोई चक्कर नहीं रहता. इस बार ब्रह्म मुहूर्त्त से ही पुण्यकाल है.
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