Darbhanga News: नेपाल के जलग्रहण क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश और कोसी बैराज से छोड़े गए पानी का असर अब कुशेश्वरस्थान पूर्वी प्रखंड में दिखने लगा है. कोसी और कमला बलान नदियों के बढ़ते जलस्तर के कारण बाढ़ का पानी निचले इलाकों में फैल गया है, जिससे जनजीवन प्रभावित होने लगा है.
तीन गांवों का सड़क संपर्क टूटा
बाढ़ का सबसे अधिक असर आवागमन पर पड़ा है. इटहर पंचायत के इटहर, चौकिया और लक्ष्मीनिया गांवों का प्रखंड मुख्यालय से सड़क संपर्क पूरी तरह टूट गया है. ग्रामीणों के लिए अब नाव ही आने-जाने का एकमात्र साधन बचा है. मरीजों को अस्पताल पहुंचाने, बच्चों को स्कूल भेजने और जरूरी सामान लाने में लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
स्कूल परिसर में घुसा बाढ़ का पानी
बाढ़ का असर शिक्षा व्यवस्था पर भी पड़ने लगा है. प्राथमिक विद्यालय लक्ष्मीनिया के परिसर में बाढ़ का पानी घुस गया है, जिससे पढ़ाई प्रभावित हो रही है. वहीं प्राथमिक विद्यालय इटहर चारों तरफ से पानी से घिर गया है.
प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी प्रिंस कुमार ने बताया कि विद्यार्थियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है. यदि जलस्तर और बढ़ता है तो एहतियातन प्राथमिक विद्यालय लक्ष्मीनिया और प्राथमिक विद्यालय इटहर पोखर को बंद कर दिया जाएगा.
चार पंचायतों में बढ़ा खतरा
कमला बलान के पश्चिमी तटबंध के पूर्व स्थित इटहर, उसरी, उजुआ सिमरटोका और तिलकेश्वर पंचायतों के निचले इलाकों में तेजी से पानी फैल रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि यदि जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो कई अन्य गांवों का संपर्क भी टूट सकता है.
राहत और नाव की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से पर्याप्त संख्या में नाव, भोजन, पेयजल, दवा और अन्य आवश्यक राहत सामग्री उपलब्ध कराने की मांग की है. प्रशासन का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल राहत सामग्री तथा नाव उपलब्ध कराई जाएगी.
सीओ राकेश रोशन भारती ने कहा कि क्षेत्र से नाव की मांग मिलते ही उपलब्ध करा दी जाएगी. जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है और लोगों से नदी किनारे नहीं जाने की अपील की गई है.
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