बारिश नहीं, डीजल के सहारे हो रही धान की खेती; 25 हजार लागत पर सिर्फ 5 हजार तक बचत

दरभंगा में अनियमित मानसून और बारिश की कमी ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. खेतों में नमी की कमी से बार-बार सिंचाई करनी पड़ रही है, जिससे धान की खेती की लागत आसमान छू रही है. ऐसे में किसानों का मुनाफा कम हो रहा है और चिंताएं बढ़ रही हैं.

Darbhanga News: कमतौल और आसपास के क्षेत्रों में अनियमित मानसून और बारिश की कमी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. खेतों में पर्याप्त नमी नहीं रहने के कारण किसानों को डीजल पंप से बार-बार सिंचाई करनी पड़ रही है. इससे धान की खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, जबकि मुनाफा घटता जा रहा है.

बारिश की कमी से बढ़ा खेती का खर्च

किसानों का कहना है कि बारिश में देरी और बीच-बीच में पड़ रहे सूखे के कारण फसल को बचाने के लिए अतिरिक्त सिंचाई करनी पड़ रही है. इसके साथ ही बीज, खाद, कीटनाशक और मजदूरी पर भी पहले से अधिक खर्च करना पड़ रहा है.

बार-बार फसल प्रभावित होने से आर्थिक नुकसान के साथ मानसिक दबाव भी बढ़ रहा है.

एक एकड़ धान की खेती पर 25 हजार रुपये तक खर्च

जाले के प्रगतिशील किसान धीरेन्द्र कुमार ने बताया कि एक एकड़ धान की रोपाई से लेकर फसल तैयार कर घर लाने तक करीब 25 हजार रुपये खर्च हो जाते हैं.

उन्होंने कहा कि यदि मौसम अनुकूल रहा और अच्छी पैदावार हुई तो करीब 30 हजार रुपये तक का उत्पादन मिल सकता है. ऐसे में अपनी जमीन होने पर भी किसान के पास मुश्किल से 5 हजार रुपये की बचत रह जाती है. यदि दो या तीन बार अतिरिक्त सिंचाई करनी पड़ जाए तो लागत और बढ़ जाती है, जिससे नुकसान होने की आशंका रहती है.

एक नजर में एक एकड़ धान की खेती की लागत

मदअनुमानित खर्च (रुपये)
जुताई5,500
एक बार पटवन2,000
बिचड़ा2,000
रोपाई (मजदूरी)5,000
खाद एवं दवा2,000
सिंचाई व छिड़काव की मजदूरी2,000
हार्वेस्टिंग5,000
अन्य खर्च1,500
कुल लागत25,000

जलवायु परिवर्तन से बढ़ी नई चुनौतियां

किसानों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण तापमान में लगातार उतार-चढ़ाव हो रहा है. इससे फसलों में कीट और बीमारियों का प्रकोप भी बढ़ गया है. फसल बचाने के लिए अतिरिक्त टॉनिक, एनपीके, जिंक और अन्य पोषक तत्वों का छिड़काव करना पड़ रहा है, जिससे खेती की लागत और बढ़ रही है.

किसानों की बढ़ रही चिंता

लगातार दो-तीन सीजन से खरीफ और रबी फसलों में नुकसान झेल रहे किसानों का कहना है कि यदि जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो इस बार भी धान की खेती घाटे का सौदा साबित हो सकती है. किसानों का मानना है कि बढ़ती लागत और मौसम की अनिश्चितता ने खेती को पहले से कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण बना दिया है.


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लेखक के बारे में

Author: Shivendra kumar shar

Published by: Aaruni Thakur

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