Darbhanga News: ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय (LNMU) में सोमवार से विश्वविद्यालय कर्मचारी संघ के बैनर तले कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों के समर्थन में अनिश्चितकालीन कलमबंद हड़ताल शुरू कर दी है. इस अचानक शुरू हुए बड़े आंदोलन के कारण विश्वविद्यालय मुख्यालय का पूरा प्रशासनिक ढांचा चरमरा गया है और फाइलों की आवाजाही पर पूरी तरह ब्रेक लग गया है. इस हड़ताल की खास बात यह रही कि नियमित कर्मचारियों के साथ-साथ आउटसोर्सिंग पर काम करने वाले कर्मियों ने भी सामूहिक रूप से काम का बहिष्कार कर दिया, जिससे आंदोलन को व्यापक और चौतरफा समर्थन मिला है.
हाजिरी बनाकर धरने पर बैठे कर्मी
प्रत्यक्षदर्शियों और संघ से मिली जानकारी के अनुसार, सोमवार की सुबह कर्मचारी रोजाना की तरह विश्वविद्यालय परिसर पहुंचे. रणनीति के तहत सभी कर्मियों ने सबसे पहले मुख्य उपस्थिति पंजी (अटेंडेंस रजिस्टर) में अपनी-अपनी हाजिरी दर्ज कराई. इसके तुरंत बाद, सभी कर्मी अपने-अपने विभागों और कार्यालयों को खुला छोड़कर बाहर निकल गए और प्रशासनिक भवन के मुख्य पोर्टिको में दरी बिछाकर धरने पर बैठ गए. कर्मचारियों के इस औचक कदम के कारण परीक्षा विभाग, सामान्य प्रशासन और अकादमिक शाखा सहित तमाम महत्वपूर्ण दफ्तरों में दिन भर कूप सन्नाटा पसरा रहा, जिससे दूर-दराज से आए छात्र-छात्राओं को बिना काम कराए ही मायूस होकर लौटना पड़ा.
एमएसीपी भुगतान और सीनेट चुनाव का मामला
धरना स्थल पर आयोजित एक विरोध सभा को संबोधित करते हुए कर्मचारी संघ के मुख्य नेताओं ने विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यशैली पर जमकर भड़ास निकाली. कर्मचारी नेताओं ने मुख्य रूप से इन मांगों को रेखांकित किया:
- वित्तीय बकाया: एमएसीपी (MACP) एवं एसीपी (ACP) मद में वर्ष 2019 से लंबित पड़े बकाए एरियर की राशि का अविलंब भुगतान किया जाए.
- लोकतांत्रिक अधिकार: विश्वविद्यालय के कर्मचारी कोटा से सीनेट सदस्य का चुनाव कराने की प्रक्रिया को तुरंत हरी झंडी दी जाए.
नेताओं ने आरोप लगाया कि इन वर्षों पुरानी जायज मांगों के समाधान के लिए कुलपति और कुलसचिव को दर्जनों बार लिखित और मौखिक रूप से अवगत कराया गया, लेकिन राजभवन और विवि प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई. उन्होंने आक्रोश जताते हुए कहा कि पूर्व के आंदोलनों के दौरान सिर्फ आश्वासन या लिखित सहमति पत्र थमाकर मामला शांत करा दिया जाता है, लेकिन धरातल पर उसका कार्यान्वयन कभी नहीं होता. संघ ने दो टूक चेतावनी दी है कि जब तक मांगों पर कोई लिखित और सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक यह तालाबंदी और आंदोलन अनवरत जारी रहेगा.
सैकड़ों आंदोलनकारी रहे मुस्तैद
विश्वविद्यालय को हिलाकर रख देने वाले इस धरने और विरोध प्रदर्शन में कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष शंकर यादव, उपाध्यक्ष अशोक कुमार अरविंद, भोला पासवान और सचिव मनोज कुमार राम ने मुख्य रूप से कमान संभाली. इसके अलावा संगठन की मजबूती को धार देने के लिए संगठन मंत्री रामसेवक भारती, उप सचिव ललन शर्मा, कोषाध्यक्ष अमृत नाथ झा, अशोक कुमार दास, शिव नारायण राय, प्रेम चन्द्र प्रसाद, नरेश कुमार महतो, प्रभात किरण, वीरेन्द्र कुमार सिंह, अकरम अली एवं शंकर पासवान सहित चंपारण और मिथिलांचल के सैकड़ों सक्रिय विवि कर्मी और तृतीय व चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी मुख्य रूप से मुस्तैद रहे.
दरभंगा से प्रवीण कुमार चौधरी की रिपोर्ट
