Darbhanga News: दरभंगा में 'खेत बचाओ अभियान' की शुरुआत, कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को दिए अहम टिप्स

Darbhanga News: दरभंगा के जाले में कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा 'खेत बचाओ अभियान' के तहत जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया . इसमें वैज्ञानिकों ने किसानों को रासायनिक खादों से बचने, पराली न जलाने और प्राकृतिक खेती अपनाने की सलाह दी.पढे़ं पूरी खबर…

दरभंगा से केशवेन्द्र प्रताप ठाकुर की रिपोर्ट

Darbhanga News: दरभंगा जिले के जाले प्रखंड अंतर्गत काजी बहेरा गांव में कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत एक दिवसीय किसान जागरूकता कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया.इस विशेष कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य मिट्टी की सेहत में सुधार करना, वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा देना और पर्यावरण संरक्षण के प्रति स्थानीय किसानों को जागरूक करना था.

रसायनों के अनियंत्रित उपयोग से बंजर हो रही भूमि

जागरूकता कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कृषि विज्ञान केंद्र के अध्यक्ष डॉ.दिव्यांशु शेखर ने कहा कि हमारे खेत और मिट्टी आने वाली पीढ़ियों की अमूल्य धरोहर हैं.उन्होंने किसानों को आगाह करते हुए कहा कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अनियंत्रित व अत्यधिक उपयोग से न केवल खेती की लागत लगातार बढ़ेगी, बल्कि भूमि की प्राकृतिक उर्वरता भी बुरी तरह प्रभावित होगी.

वैज्ञानिकों ने दिया ‘4आरसिद्धांत’ और प्राकृतिक खेती का मंत्र

कार्यक्रम में मौजूद कृषि वैज्ञानिक इंजीनियर निधि कुमारी ने संतुलित उर्वरक प्रबंधन पर विशेष जोर दिया और किसानों को कृषि में ‘4आरसिद्धांत’ अपनाने की सलाह दी.वहीं, गृह वैज्ञानिक डॉ.पूजा कुमारी ने मिट्टी जांच के महत्व, प्राकृतिक खेती और रसायनमुक्त कृषि के दूरगामी लाभों की विस्तृत जानकारी साझा की.उन्होंने बताया कि प्राकृतिक खेती को अपनाकर किसान लागत कम कर सकते हैं, पानी की भारी बचत कर सकते हैं और मिट्टी की उपजाऊ क्षमता को भी लंबे समय तक बरकरार रख सकते हैं.

पराली जलाने से पर्यावरण और मित्र कीटों को भारी नुकसान

वैज्ञानिकों ने किसानों को अंधाधुंध रासायनिक खादों के उपयोग से बचने, जैविक खाद व वर्मीकंपोस्ट (केंचुआ खाद) को प्राथमिकता देने तथा आधुनिक कृषि तकनीकों से जुड़ने की अपील की.इसके साथ ही उन्होंने खेतों में पराली (फसल अवशेष) न जलाने की सख्त सलाह दी.वैज्ञानिकों के अनुसार, पराली जलाने से मिट्टी में मौजूद किसानों के दोस्त जीव व सूक्ष्म पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं, जिससे पर्यावरण को भी भारी नुकसान पहुंचता है.इस जागरूकता कार्यक्रम में ग्रामीण क्षेत्र की 39 महिला कृषकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और वैज्ञानिक खेती के गुर सीखे.

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Published by: SUMIT KUMAR

सुमित पत्रकारिता में पिछले 4 वर्षों से सक्रिय। प्रभात खबर के प्रिंट मीडिया के साथ काम करने के बाद वर्तमान में प्रभात खबर की डिजिटल टीम से जुड़े हुए हैं। क्राइम, हाईपरलोकल, स्वास्थ्य विभाग व राजनीतिक रिपोर्टिंग में विशेष रुचि और अनुभव रखते हैं। क्षेत्रीय मुद्दों और जनसरोकार की खबरों को सशक्त तरीके से उठाने के लिए जाने जाते हैं।

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