दरभंगा के बिरौल से शंकर सहनी की रिपोर्ट
Darbhanga News: दरभंगा के बिरौल स्थित कृषि अनुसंधान केंद्र में मंगलवार रात आई तेज आंधी और बारिश में केंद्र की नवनिर्मित चाहरदीवारी का बड़ा हिस्सा अचानक ढह गया. राहत की बात यह रही कि घटना देर रात हुई, इसलिए कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ. लेकिन दीवार गिरने के बाद निर्माण में गड़बड़ी और लापरवाही के आरोप तेज हो गए हैं. स्थानीय लोगों और किसानों ने पहले से ही चाहरदीवारी के निर्माण में खराब सामग्री इस्तेमाल होने का आरोप लगाया था.
ग्रामीणों ने लगाए गंभीर आरोप
स्थानीय ग्रामीण चंद्र विजय साहू और सुशील सहनी ने बताया कि निर्माण में घटिया ईंट, खराब बालू और कम सीमेंट का इस्तेमाल किया गया. उनका कहना है कि नींव भी मानक के अनुसार गहरी नहीं खोदी गई थी। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि निर्माण कार्य में शुरू से ही लापरवाही साफ दिख रही थी।
शिकायत के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई
ग्रामीणों का कहना है कि कई बार ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों से शिकायत की गई, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। अब दीवार गिरने से सरकारी पैसे की बर्बादी हुई है और लोगों में नाराजगी बढ़ गई है।
महत्वपूर्ण केंद्र में सुरक्षा पर उठे सवाल
कृषि अनुसंधान केंद्र कृषि शोध और बीज उत्पादन का अहम केंद्र माना जाता है. यहां कई कीमती उपकरण, शोध सामग्री और बीज भंडार रखे जाते हैं. ऐसे में चाहरदीवारी गिरने से सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं. घटना के बाद ग्रामीणों में काफी आक्रोश है. लोगों ने पूरे निर्माण कार्य की उच्चस्तरीय जांच कराने मांग की है. साथ ही मानक के अनुसार दोबारा चाहरदीवारी निर्माण कराने की मांग भी उठाई गई है.
केंद्र प्रभारी का बयान
बिरौल कृषि अनुसंधान केंद्र प्रभारी ड्रा मुकेश कुमार सिंह ने बताया कि पूसा यूनिवर्सिटी समस्तीपुर निर्माण कार्य करवा रहे हैं. यूनिवर्सिटी के तरफ से जो ठेकेदार नियुक्त किए गए हैं. उनकी देखरेख में निर्माण किया जा रहा है. गुणवत्तापूर्ण निर्माण नही किये जाने की बात पर उन्होंने इसके बारे में इंजीनियर ही मापदंड के बारे में बता सकते हैं.
