आर्द्रा निकल गया, पुनर्वसु भी शुरू... फिर भी सूखे हैं खेत, आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे किसान

मानसून की बेरुखी से जाले प्रखंड में खरीफ की खेती पर संकट गहरा गया है। बारिश न होने से धान और मक्के की बुआई अटकी, किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं।

Darbhanga Monsoon: आर्द्रा नक्षत्र समाप्त हो चुका है और अब पुनर्वसु नक्षत्र भी शुरू हो गया है, लेकिन जाले प्रखंड में मानसून की सुस्ती किसानों की चिंता बढ़ा रही है. जिन खेतों में इस समय धान का बिचड़ा लहलहाना चाहिए था, वहां धूल उड़ रही है. किसान हर दिन आसमान की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं.

यह भी पढ़ें: पहले शादी का झांसा, फिर कोर्ट मैरिज... अब 5 लाख दहेज नहीं देने पर घर से निकालने का आरोप

आर्द्रा नक्षत्र क्यों माना जाता है अहम?

किसानों के अनुसार खरीफ खेती के लिए आर्द्रा नक्षत्र सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है. इसी अवधि में धान का बिचड़ा तैयार किया जाता है और मक्का समेत अन्य फसलों की बुआई शुरू होती है.

लेकिन इस बार मौसम ने साथ नहीं दिया. समय पर बारिश नहीं होने से खेती का पूरा कैलेंडर पीछे खिसकता नजर आ रहा है.

कहीं बूंदाबांदी, कहीं पूरी तरह सूखे खेत

जाले प्रखंड के कुछ इलाकों में हल्की बारिश जरूर हुई, लेकिन अधिकांश गांवों में खेत अब भी सूखे पड़े हैं. बादल आते हैं, कुछ देर तक आसमान ढका रहता है, फिर तेज धूप और उमस लोगों की परेशानी बढ़ा देती है.

नतीजा यह है कि न तो धान का बिचड़ा डाला जा सका है और न ही मक्के की बुआई रफ्तार पकड़ पाई है.

धान, मक्का और दलहन पर मंडराने लगा संकट

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बारिश में और देरी हुई तो धान और मक्का की खेती सबसे अधिक प्रभावित होगी. इसके साथ ही दलहन फसलों की बुआई भी समय से नहीं हो पाएगी.

इसका सीधा असर किसानों की आमदनी और कृषि उत्पादन पर पड़ सकता है.

सूख रहे हैं तालाब और आहार

बारिश नहीं होने से क्षेत्र के नदी, नाले, आहार और तालाब भी सूखने की कगार पर पहुंच गए हैं. सामान्य वर्षों में आर्द्रा नक्षत्र की बारिश से इन जलस्रोतों में पर्याप्त पानी जमा हो जाता था, जिससे सिंचाई आसान हो जाती थी.

इस बार पानी की कमी ने किसानों की चिंता और बढ़ा दी है.

खाद-बीज खरीदने से भी बच रहे किसान

अनिश्चित मौसम के कारण कई किसानों ने अभी तक खाद और बीज की खरीदारी भी नहीं की है. उनका कहना है कि पहले बारिश हो जाए, तभी खेती की तैयारी आगे बढ़ाई जाएगी.

ग्रामीण किसानों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों से मानसून की अनियमितता के कारण खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, जबकि उत्पादन घटता जा रहा है.

अब पुनर्वसु नक्षत्र से उम्मीद

फिलहाल जाले के किसान पुनर्वसु नक्षत्र में अच्छी बारिश की उम्मीद लगाए बैठे हैं. उनका मानना है कि यदि आने वाले दिनों में पर्याप्त वर्षा होती है तो धान की रोपाई और खरीफ खेती को अभी भी पटरी पर लाया जा सकता है.

यह भी पढ़ें: 21 साल से वही स्वाद… मुजफ्फरपुर के इस समोसे के लिए आज भी दूर-दूर से पहुंचते हैं लोग


प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Author: Shivendra kumar shar

Published by: Aaruni Thakur

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.
और पढ़ें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >