दरभंगा : शांत समझा जानेवाला यह जिला अचानक अशांत हो गया है. पुलिसिया लापरवाही की वजह से महज चार दिनों के भीतर दो बड़ी वारदातें हो गयी. इसमें लाखों का नुकसान तो हुआ ही, विधि-व्यवस्था पूरी तरह बेलगाम नजर आयी. इन वारदातों ने विधि-व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा दिया है.
वरीय अधिकारियों को इसकी पुनर्समीक्षा करनी होगी साथ ही ठोस कदम उठाने होंगे. हालांकि कार्रवाई की गयी है लेकिन घटना की गंभीरता को देखते हुए इसे नाकाफी ही कहा जायेगा. उल्लेखनीय है कि गत 15 नवंबर को जहां ट्राफिक के जमादार की हत्या के बाद खुद पुलिसवालों ने उत्पात मचाना शुरू कर दिया, वहीं 18 नवंबर को पुलिसिया कार्रवाई से विक्षुब्ध आक्रोशित सिमरीवासियों ने थाने पर जमकर बवाल काटा.
इन दोनों घटनाओं ने जिले की शांतिप्रिय छवि को दागदार कर दिया. 15 नवंबर को ट्रैफिक जमादार की हत्या के बाद जिस तरह पुलिस वालों ने दो घंटे तक तांडव मचाया, उसमें दो दर्जन से अधिक गरीबों की दुकान तबाह हो गयी. लाखों का नुकसान दुकानदारों को झेलना पड़ा. आश्चर्यजनक पहलू यह रहा कि इस मामले मेंं महकमा की ओर से दोषी पुलिस के जवानों पर कोई कार्रवाई नहीं की गयी. जहां सड़क जाम करने पर पुलिस अधिकांश मामलों में प्राथमिकी दर्ज कर देती है,
वहीं आगजनी व तोड़फोड़ जैसे संगीन वारदात को अंजाम देने वाले पुलिस बलों को क्लीन चिट दे दिया. जब इस संबंध में एक अधिकारी से बात की गयी तो उन्होंने सड़क जाम के एक मामले का उदाहरण देते हुए यह कह दिया कि उस मामले में भी तो एफआइआर नहीं हुई. हद तो तब हो गयी जब एक वरीय अधिकारी ने इस पूरे मामले में आमजन पर ही तोहमत लगा दी.
उन्होंने कह दिया कि जमादार की हत्या से आक्रोशित आमजन ने ही तोड़फोड़ की. जब पुलिस बल के बारे में कहा गया तो जवाब दिया कि यह तो अतिक्रमणमुक्ति अभियान में टूटा. इसपर जब आगजनी का हवाला दिया गया तो कन्नी काट गये. जानकारों की मानें तो इसी वजह से सिमरी की घटना में उपद्रवियों का मनोबल बढ़ा और इतनी बड़ी वारदात हो गयी.
इसे महज संयोग ही कहेंगे कि कोई अनहोनी नहीं हुई. जिस तरह आक्रोशित लोग थाने को घेरकर रोड़ेबाजी कर रहे थे, गाडि़यों में आग फूंक दी थी, किसी भी बड़ी घटना से इंकार नहीं किया जा सकता था. वैसे सिमरी के इस मामले में थानाध्यक्ष पर कार्रवाई कर महकमा ने अपनी संजीदगी दिखाने की कोशिश की, लेकिन जानकारों की मानें तो इस घटना के मूल में प्रशासन के वरीय अधिकारी हैं. ज्ञातव्य हो कि छठ के दिन हुई इस घटना के बाद लाग शांत हो गये थे.
शांति समिति की बैठक चल रही थी, लेकिन क्षेत्रवासी वरीय अधिकारी को बुलाने की मांग कर रहे थे. सूत्र बताते हैं कि वरीय पदाधिकारीगण को समय से इस घटना की सूचना भी दे दी गयी थी. लेकिन दोनों वरीय अधिकारी वहां नहीं पहुंचे. नतीजतन इतनी बड़ी वारदात हो गयी. हालांकि विधि-व्यवस्था हाथ से निकल जाने के बाद डीएम व एसएसपी वहां पहुंचे, परंतु अगर ये पदाधिकारी ससमय वहां पहुंच गये होते तो शायद इतनी बड़ी घटना नहीं होती और विधि-व्यवस्था पर सवालिया निशान नहीं लगता.
