सामा खेलय चलली, भौजी संग सहेली

सामा खेलय चलली, भौजी संग सहेली बहनों ने किया भगवती सामा का स्पर्शफोटो. 44 व 62परिचय. सामा खरीदकर ले जाती व घर पर सामा के गीत गाती बहनेंदरभंगा: भाई की समृद्धि व दीर्घायु जीवन की मंगलकामना के साथ मिथिला का अनोखा लोक पर्व सामा-चकेबा बुधवार से आरंभ हो गया. पहले ही दिन से सामा-गीत के […]

सामा खेलय चलली, भौजी संग सहेली बहनों ने किया भगवती सामा का स्पर्शफोटो. 44 व 62परिचय. सामा खरीदकर ले जाती व घर पर सामा के गीत गाती बहनेंदरभंगा: भाई की समृद्धि व दीर्घायु जीवन की मंगलकामना के साथ मिथिला का अनोखा लोक पर्व सामा-चकेबा बुधवार से आरंभ हो गया. पहले ही दिन से सामा-गीत के बोल वातावरण में गूंजने शुरू हो गये. बुधवार को बहनों ने कुंभकारों के यहां से सामा-चकेबा की मूर्ति खरीदी. मौलागंज, बाजितपुर सहित विभिन्न स्थानों पर मूर्तिकारों के घर पर खरीदारों की भीड़ जमा रही. वहीं ठेला पर भी मूर्ति रख गली-गली जाकर इसकी बिक्री की गयी. इधर सामा खरीदकर घर लाने के बाद प्रतीकात्मक रूप में बहनों ने वृंदावन बनाया. चुगला तैयार किया. इसके बाद भगवती सामा की मूर्ति डाला में रख दी गयी. इसके बाद रात ढलते ही बहनों की टोली घर-घर से अपना डाला लेकर बाहर निकली. चौराहे पर इनका मिलन हुआ. यहां सभी ने मिलकर सामा खेलना आरंभ किया. भाई के कल्याण की कामना पर आधारित गीतों का गयान किया. इस बीच ननद-भौजाई के बीच हंसी-ठिठोली भी होती रही. इनके ठहाकों से रात खिलखिला उठी. डाला फेरने के बाद बहनों ने परंरानुरूप वृंदावन में आग लगाया. इसके बाद खुद उसे बुझाया. सामाज व परिवार तोड़ने के प्रतीक चुगला का दाह किया. उल्लेखनीय है कि सप्तमी तिथि से आरंभ हुए इस लोकपर्व का समापन प्रतिमा विसर्जन के साथ पूर्णिमा तिथि को होगा.

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