पट खुलते ही भक्तों के कदम मुड़े पूजा पंडालों की ओर
माता के दर्शन व पूजन के लिए देर रात तक लगी रही श्रद्धालुओं की कतार
भक्ति गीत के बोल व माता के जयकारे से गूंजता रहा कोना-कोना
सतरंगी रोशनी से नहाया पूरा शहर
दरभंगा : शक्ति की देवी भगवती दुर्गा के दर्शन के साथ ही श्रद्धालुओं की व्याकुलता शांत हो गयी. पिछले सात दिनों से इस घड़ी का बेसब्री से इंतजार कर रहे भक्तों की व्यग्रता शनिवार की सुबह छलक पड़ी. स्नान आदि से निवृत्त होकर भक्तों की टोली माता के दर्शन के लिए निकल पड़ी. पूजा पंडालों में देखते ही देखते कतार लग गयी. श्रद्धालुओं ने माता का दर्शन किया.
पूजन कर मनोवांछित फल प्राप्ति के लिए आशीर्वाद मांगा. इसे लेकर आजमनगर, कादिराबाद, नाका दो, कटहलबाड़ी, बालूघाट, चूनाभट्ठी, लक्ष्मीसागर, भगत सिंह चौक, उर्दू बाजार, हसनचक, अललपट्टी, पिताम्बरी बंगला स्कूल, दोनार, बेंता, मौलागंज, रामपुर रहमगंज, नाका छह, सैदनगर, केएम टैंक, गायत्री मंदिर, चट्टी चौक, गांधीनगर कटरहिया, दरभंगा जंक्शन, हनुमान मंदिर, मूसा साह स्कूल समेत दर्जनों पूजा पंडालों में भक्तों का रेला उमड़ पड़ा. दूसरी ओर भगवती मंदिर श्यामा धाम, कंकाली मंदिर, म्लेच्छमर्दिनी मंदिर, सैदनगर काली मंदिर सहित अन्य मंदिरों में भी भक्तों ने पूजा-अर्चना की. उल्लेखनीय है कि सुबह निर्धारित मुहूर्त्त पर बेलतोड़ी की रस्म अदा की गयी. इसके पश्चात विधिवत पूजन कर माता का पट भक्तों के दर्शनार्थ खोल दिया गया. इस दौरान माता के जयकारे से वातावरण गूंज उठा. भक्ति गीत के बोल फिजा में घुलते रहे.
पट खुलते ही महिलाओं की टोली माता का खोईंछा भरने के लिए जमा हो गयी. अरबा चावल, फल, पान, सुपारी, फूल, मिठाई, शृंगार संसाधन सहित अन्य सामग्री से माता का खोईंछा भरा. खुशियों से आंचल भरे रखने का आशीर्वाद मांगा. इधर सप्तमी तिथि से ही कुंवारी पूजन व कुंवारी भोजन का क्रम तेज हो गया. श्रद्धालुओं ने कुंवारी कन्याओं का पूजन कर उनका शृंगार किया. फिर मीठा प्रसाद भोजन कराया. बता दें कि कुंवारी पूजन एवं खोईंछा भरने की अधिकता अष्टमी व महानवमी पर रहेगी. देर रात अष्टमी तिथि होने के कारण शास्त्रीय विधि से निशा पूजन भी किया गया.
