ट्रेन में स्लीपर श्रेणी के मात्र 12 कोच ही थे, एस-13 कोच नहीं रहने के कारण यात्रियों को हुई दिक्कत
दरभंगा जंक्शन पर कुछ देर के लिए यात्रियों के बीच रही अफरातफरी
ट्रेन खुलने का वक्त देख सामने की बोगियों में सवार हो गये यात्री
स्टेशन पर यात्रियों की सहायता को ले सामने नहीं आया कोई अधिकारी
दरभंगा : रेलवे की गलती का खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है. आरक्षण का टिकट यात्री जब ट्रेन में सवार होने के लिए दरभंगा स्टेशन पर पहुंचे तो उन्हें अपनी आरक्षित कोच ही नहीं नजर आई. पहले तो यात्री ट्रेन के आगे-पीछे संबंधित कोच को ढूंढ़़ते रहे, लेकिन जब नजर नहीं आया तो मानो उनके पांव के नीचे की जमीन ही खिसक गई. कोई बताने वाला भी नहीं नजर आरहा था.
गुरुवार को दरभंगा जंक्शन पर कुछ देर के लिए यात्रियों के बीच इसे लेकर अफरातफरी की स्थिति उत्पन्न हो गई. ट्रेन खुलने का वक्त हो गया, तो जिस यात्री के सामने जो बोगी नजर आयी उसी में सवार हो गए. अब समस्या की मूल वजह रेलवे आरक्षण कंप्यूटर के सिस्टम में ट्रेन के ब्रेक के अनुसार बर्थ सीट नहीं होना बताया जा रहा.
यात्रियों को रेलवे आरक्षण काउंटर से एस-13 कोच में रिजर्वेशन टिकट दिया गया था. निर्धारित समय पर जब यात्री पहुंचे तो पूरी ट्रेन में इस नंबर का कोच नहीं मिला. दरअसल इस रेक में स्लीपर श्रेणी के मात्र 12 कोच ही थे. जबकि एस-13 कोच में पूरे के पूरे 72 यात्रियों को आरक्षण टिकट जारी कर दिया गया था.
देश की सर्वाधिक भीड़ वाली ट्रेन है संपर्क क्रांति : ट्रेन की टाइमिंग एवं अपेक्षाकृत कम लेटलतीफी के कारण दिल्ली की ओर जाने वाली गाड़ियों में यह ट्रेन उत्तर बिहार के यात्रियों की पहली पसंद वाली गाड़ी है. लिहाजा इसमें भीड़ अधिक होती है. पिछले वर्ष राष्ट्रीय स्तर पर हुए सर्वेक्षण के अनुसार बिहार संपर्क क्रांति देश की सबसे अधिक भीड़ वाली गाड़ी है. इसमें वेटिंग लिस्ट सबसे अधिक पाई गई. बावजूद रेल प्रशासन इस ट्रेन के यात्रियों की समस्या को नजरअंदाज करता आ रहा है.
