सासाराम नगर थानाध्यक्ष को कोर्ट ने सुनाई दो दिन कारावास की सजा, एसपी को भी कारण बताओ नोटिस

सासाराम जिला व्यवहार न्यायालय ने करीब 18 साल पुराने परिवाद से जुड़े एक मामले में सुनवाई करते हुए सासाराम नगर थानाध्यक्ष को कार्य में कोताही बरतने को लेकर दो दिन के कारावास की सजा सुनाई है. साथ ही एसपी को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया है.

बिहार में कोर्ट द्वारा काम में कोताही बरतने वाले पुलिसकर्मियों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है. बीते दिनों का मामलों में कोर्ट ने पुलिस के काम पर सवाल उठाए हैं. लेकिन अब इससे एक कदम आग बढ़ते हुए सासाराम जिला व्यवहार न्यायालय ने सासाराम नगर थानाध्यक्ष को दो दिन के लिए जेल भेज दिया. साथ ही जिले के एसपी को शो कॉज़ किया गया है.

दो दिन के साधारण कारावास की सजा

दरअसल, सासाराम जिला व्यवहार न्यायालय की प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट निवेदिता कुमारी के न्यायालय ने करीब 18 साल पुराने परिवाद से जुड़े एक मामले में सुनवाई करते हुए सासाराम नगर थानाध्यक्ष को कार्य में कोताही बरतने को लेकर दो दिन के साधारण कारावास की सजा देने का आदेश जारी किया है. साथ ही इस मामले में एसपी रोहतास को कारण बताओ नोटिस जारी किया है.

पांच हजार रुपये स्थगन हर्जाना लगाया गया था

यह मामला परिवाद संख्या 1018/2005 से जुड़ा है, जिसमें शहर के मुहल्ला महावीर स्थान कुराईच के दो अभियुक्तों संजय कुमार श्रीवास्तव व भरत प्रसाद श्रीवास्तव की मृत्यु से संबंधित रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत करने के लिए कई बार न्यायिक आदेश जारी किया गया था. इसके बावजूद नगर थानाध्यक्ष द्वारा मामले में लापरवाही बरती जा रही थी, जिसको लेकर पूर्व में कोर्ट ने नगर थानाध्यक्ष के खिलाफ पांच हजार रुपये स्थगन हर्जाना लगाया गया था. इसके बाद भी नगर थानाध्यक्ष द्वारा लगातार कानूनी आदेशों की अवहेलना की जा रही थी. इसके बाद कोर्ट ने सख्ती दिखते हुए थानाध्यक्ष को दो दिन कारावास की सजा सुनाई.

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एसपी को भी कारण बताओ नोटिस

इस मामले में कोर्ट ने वरीय पदाधिकारी एसपी रोहतास को भी न्यायिक आदेश जारी किया था. एसपी द्वारा भी न्यायिक आदेश का तामिला नहीं किया गया. इसके बाद कोर्ट ने उनके खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए कहा है कि क्यों नहीं आप के खिलाफ भादवि की धारा 176 के तहत मुकदमा चलाया जाये? कोर्ट ने इसके साथ ही नगर थानाध्यक्ष के विरुद्ध गैर जमानतीय वारंट जारी करने का आदेश दिया है. एसपी को हर हाल में 19 जून से पहले वारंट का तमिला कराने का आदेश दिया गया है. ताकि दो दिन की सजा नगर थानाध्यक्ष भुगत सकें.

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