Chhath Puja Special Train में वेटिंग, प्रदेश लौटने की राह आसान नहीं, अब तत्काल टिकट के भरोसे यात्री

Chhath Puja 31 अक्टूबर को खत्म हो रहा है. उसके दूसरे दिन एक नवंबर को चलाई जाने वाली सहरसा-आनंद विहार स्पेशल ट्रेन (01661) के स्लीपर कोच में अभी ही 126 वेटिंग है. सहरसा से अम्बाला के लिए 11 नवंबर को चलने वाली स्पेशल ट्रेन के स्लीपर कोच में 11 को 135 आरएसी यानी बैठने के लिए आधी सीट मिलेंगी.

Chhath Puja 31 अक्टूबर को खत्म हो रहा है. जैसे तैसे लोग अपने घर तो पहुंच गए मगर उनके लिए वापस लौटना भी अब इतना आसान नहीं होगा. पूजा के दूसरे दिन एक नवंबर को चलाई जाने वाली सहरसा-आनंद विहार स्पेशल ट्रेन (01661) के स्लीपर कोच में अभी ही 126 वेटिंग है. सहरसा से अम्बाला के लिए 11 नवंबर को चलने वाली स्पेशल ट्रेन के स्लीपर कोच में 11 को 135 आरएसी यानी बैठने के लिए आधी सीट मिलेंगी. ट्रेन की स्थिति यह है कि 11 को छोड़कर परिचालन की तिथि 1, 4 और 8 नवंबर को वेटिंग में टिकट मिल रहा है. हालांकि इस ट्रेन के थ्री एसी में 11 और टू एसी में 8 नवंबर को कन्फर्म टिकट मिल रहा है. अब सहरसा से रोज नई दिल्ली जाने वाली वैशाली एक्सप्रेस की बात करें तो इसके स्लीपर कोच में 19 दिसंबर तक सीट फूल है. इस ट्रेन के थ्री एसी कोच में 20 नवंबर और टू एसी में 13 दिसंबर तक कन्फर्म बर्थ नहीं मिल रहा.

गरीब रथ एक्सप्रेस दिसंबर तक कन्फर्म टिकट नहीं

अमृतसर जाने वाली गरीबरथ एक्सप्रेस की बात करें तो इस ट्रेन के थ्री एसी कोच में दिसंबर तक कन्फर्म टिकट नहीं मिल रहा. जनवरी के आठ तारीख को जाकर कन्फर्म बर्थ मिल रहा. इस ट्रेन के चेयरकार कोच में 21 नवंबर को कन्फर्म टिकट मिल रहा. सहरसा से मुंबई जाने वाली साप्ताहिक ट्रेन हमसफर एक्सप्रेस में भी सीट के लिए मारामारी है. इस ट्रेन के स्लीपर कोच में 27 दिसंबर और थ्री एसी में 22 नवंबर से पहले कन्फर्म टिकट नहीं मिल रहा है.

यात्रियों की मजबूरी का फायदा उठाएंगे बिचौलिये

छठ पूजा मनाने के बाद अपने कार्यस्थल, पढ़ाई वाले जगह सहित अन्य जगहों लौटने वाले यात्रियों की भीड़ बढ़ेगी. रेलवे ने यात्रियों की संभावित भीड़ को ध्यान में रखते कई स्पेशल ट्रेन सहरसा से चलाने की अधिसूचना जारी की है. लेकिन स्पेशल ट्रेनों में अभी ही वेटिंग लिस्ट आ जाने के कारण तत्काल टिकट पाने के लिए मारामारी होगी. यात्रियों की मजबूरी का फायदा उठाने के लिए टिकट बिचौलिये भी सक्रिय रहेंगे. ऐसे में अतिरिक्त स्पेशल ट्रेन चलाने की व्यवस्था के साथ-साथ चल रही ट्रेनों में कोच की संख्या बढ़ा देना रेलवे के लिए बेहतर विकल्प हो सकता है.

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