लाभ नहीं. 2014 में ही शुरू हुआ निर्माण कार्य
अधिकारियों की उदासीनता के कारण किसानों को नहीं मिल
रहा योजनाओं का लाभ
किसान भवन जल्द नहीं
बना, तो होगा आंदोलन
रामगढ़वा : किसानों को एक छत के नीचे सभी सुविधाएं मुहैया कराने की योजना अधर में है. निर्माण कार्य प्रारंभ होने के 26 माह बीतने के बाद भी प्रखंड परिसर में बनने वाला ई. किसान भवन अबतक तैयार नहीं हो सका है. जिस कारण जर्जर आवास में कृषि कर्मी अपने दायित्वों का निर्वहन करने को मजबूर है. कृषि कर्मियों व किसानों की ई. किसान भवन के निर्माण कार्य प्रारंभ होने से जगी उम्मीद अब धूमिल होने लगी है.
संवेदक व अधिकारियों की उदासीनता के कारण अबतक भवन का निर्माण कार्य पूर्ण नहीं हो सका है. बिहार सरकार के योजना एवं विकास विभाग की यह योजना वर्ष 2014/15 में स्वीकृति है, जिसकी निविदा मोतिहारी के शिवा कंसट्रक्शन को मिला हुआ है.
भवन के निर्माण पर खर्च : तीन मंजिले किसान भवन के निर्माण पर एक करोड़ 13 लाख एक हजार पांच सौ 65 रुपये की राशि खर्च होनी है. क्षेत्र अभियंता संगठन कार्य प्रमंडल -2 पकड़ीदयाल की देखरेख में किया जाना है काम.
किसानों को क्या होगा फायदा
कंप्यूटर से सुसज्जित इस भवन में एक छत के नीचे सभी कृषि कर्मियों के लिए अलग-अलग कक्ष के साथ सभा कक्ष व प्रशिक्षण कक्ष भी होगा जहां पर किसानों को आधुनिक तकनीक से खेती करने का कंप्यूटर से प्रशिक्षण दिया जायेगा व किसान सलाहकार समिति के अध्यक्ष का भी अलग कक्ष होगा.
क्या कहते हैं लोग : हरिमोहन भगत उर्फ राजू भगत, राधामोहन सिंह, हरि नारायण शर्मा, श्याम प्रकाश, शैलेश पांडेय, राजेश शुक्ल आदि लोगों का कहना है कि संवेदक व अधिकारियों की मिलीभगत व उदासीनता के कारण आजतक भवन का निर्माण कार्य पूर्ण नहीं हो सका है जिस कारण किसानों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. परंतु संवेदक की उदासीनता व अधिकारियों की मिलीभगत के कारण ई. किसान भवन का कार्य निर्माणाधीन है. एक तरफ सरकार किसानों के लिए तरह-तरह की योजना चला रही है. दूसरी तरफ अधिकारियों की उदासीनता के कारण किसान को योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है. यदि किसान भवन जल्द नहीं बना तो इसके लिए आंदोलन किया जायेगा.
क्या कहते हैं बीएओ : प्रखंड कृषि पदाधिकारी राजीव कुमार का कहना है कि भवन नहीं बनने के कारण काफी परेशानी हो रही है एक छोटे से रूम में दायित्वों का निर्वहन करना पड़ता है. कृषि कर्मियों को बैठने के लिए जगह भी नहीं है, जिस कारण इधर-उधर भटकना पड़ता है.
