रक्सौल : सिमरन की मां खुशबू देवी अपने बेटे के अपहरण से रिहाई के लिए संतोष सिंह के साथ शमीम से जेल में मिलने गयी. इस मुलाकात में दोनों के रिश्ते काफी करीब हो गये. एक तरफ पहनगार बन शमीम खुशबू के दिल में जगह बना रहा था तो दूसरी तरफ उसके परिवार के सदस्यों का अंत कर खुशबू की संपत्ति पर कब्जा करने का सपना पाल रहा था.
आखिरकार शमीम इसमें कामयाब हुआ है और संपत्ति के साथ-साथ उसकी बेटी सिमरन को जिंदगी भर सिहरने के लिए छोड़ दिया. शमीम से सिमरन की मां 2012 में मोतिहारी के गांधी चौक पर मिली और अपना घर छोड़ कर मोतिहारी में रहने का फैसला कर लिया तब शमीम ने मठिया जिरात में उसे किराये के मकान में रखा और मिलने जाता था. शमीम ने तब खुशबू की बेटी सिमरन का नामांकन आठवीं कक्षा में डीपीएस स्कूल में कराया था.
ऐसी जानकारी शमीम ने भारत और नेपाल के जांच एंजेसियों को दी है. शमीम ने यह भी बताया है कि 2013 में जिस दिन उसके घर पर छापेमारी हुई. वहां से पुलिस को स्कारपियो, बोलेरो, मारुति वैन, एसेंट कार मिला था. इसी दौरान पुलिस ने जब उसके घर का ताला तोड़ा तो अंदर सिमरन मिली थी. शमीम का कहना है कि सिमरन ड्रग्स का ओवरडोज ले रखी थी क्योंकि वह चंदन नाम के एक युवक से प्रेम करती थी और छापेमारी से तीन दिन पहले चंदन के साथ फरार हो गयी थी. छापेमारी के एक दिन पहले छपरा के एक व्यक्ति ने सिमरन को एक बार फिर से शमीम के हवाले कर दिया था. तब शमीम ने बाहर से ताला लगा अंदर खाना रखकर घर से नेपाल चला आया था. उसने यह भी बताया कि सिमरन उससे नफरत करती थी और हर हाल में वह उसके पास से निकलना चाहती थी.
उसने पुलिस को यह भी बताया था कि उसकी मां खुशबू देवी के चाहनेवाले भी कई थे और लगातार खुशबू का पीछा कर रहे थे, जिसके कारण खुशबू को रास्ते से हटाना पड़ा. उसने यह भी स्वीकार किया कि खुशबू देवी का नाम उसने आसमां परवीन रखा था तो सिमरन का नाम रुखसाना परवीन रखा था.
शमीम ने खोले कई राज
मोतिहारी के एक स्कूल में सिमरन का शमीम ने कराया था नामांकन
बेटी का दर्जा दे, सिमरन के साथ शैतान-सा किया व्यवहार
