त्याग-बलिदान के पर्व पर हुई कुर्बानी

मोतिहारी : ईद-उल-अजहा का पर्व मंगलवार को परंपरागत तरीके से मनाया गया. इस दौरान बकरीद पर्व पर शहर से लेकर सुदूर गांव तक जश्न का माहौल रहा. समुदाय के लोगों ने एक-दूसरे के साथ पर्व की खुशियां बांटी, और गले मिलकर बधाइयां दी. मौसम के मिजाज को देखते हुए कई जगहों पर ईदगाह की जगह […]

मोतिहारी : ईद-उल-अजहा का पर्व मंगलवार को परंपरागत तरीके से मनाया गया. इस दौरान बकरीद पर्व पर शहर से लेकर सुदूर गांव तक जश्न का माहौल रहा. समुदाय के लोगों ने एक-दूसरे के साथ पर्व की खुशियां बांटी, और गले मिलकर बधाइयां दी. मौसम के मिजाज को देखते हुए कई जगहों पर ईदगाह की जगह मसजिद में नमाज अदा की गयी. शहर स्थित बड़ी मसजिद में ईद-उल-अजहां की नमाज अदा हुई. भीड़ को देखते हुए तीन जमात में नमाज अदा की गयी. तय समय के मुताबिक पहली जमात की नमाज सुबह आठ बजे एवं दूसरी व तीसरी जमात ने आधे घंटे के अंतराल पर नमाज अदा की.

एक-दूसरे को दी बकरीद की बधाई
नमाज अदा करने के बाद समुदाय के लोगो ने एक-दूसरे के गले मिलकर बकरीद की बधाई दी. इसके बाद पर्व पर बकरों की कुर्बानी का सिलसिला शुरू हुआ. वही बकरीद पर्व को लेकर घरों में विभिन्न प्रकार के लजीज व्यंजन भी बनाये गये. पर्व की खुशियों के बीच लोग दावत पर अपने रिश्तेदार व दोस्तों के यहां भी सरीख हुए.
सुरक्षा का रहा पुख्ता इंतजाम
बकरीद पर्व को लेकर शहर सहित गांव तक सुरक्षा का पुख्ता इंतजाम रहा. शहर के सभी चौक-चौराहों पर दंडाधिकारी की तैनाती मे पुलिस बल मौजूद थे. वही मसजिद के आसपास के इलाकों में पुलिस जवान ड्यूटी पर तैनात किये गये थे. सुरक्षा के बीच शांतिपूर्ण माहौल में समुदाय के लोगों ने बकरीद पर्व मनाया.
त्याग व बलिदान का पर्व है बकरीद
ईद-उल-अजहा का पर्व त्याग व बलिदान का मिशाल है. शहर के बड़ी मस्जिद के ईमाम कारी जलालुद्दीन कासमी बताते है कि बकरीद पर कुर्बानी का मुख्य उद्देश्य धन का मोह खत्म होना है.
अपना धन दूसरों के लिए कुर्बान कर देना सबसे बड़ी ईमानदारी माना जाता है.कहा कि पर्व पर तीन दिनों तक कुर्बानी का खास महत्व है.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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