एसएसबी व पुलिस का निष्क्रियता का लाभ उठा रहे हैं तस्कर
आदापुर : उर्वरक तस्करी के रूप में विख्यात स्थानीय प्रखंड क्षेत्र में एक बार फिर उर्वरक तस्करी का धंधा जोर पकड़ने लगी है. नतीजतन सीमाई क्षेत्र के विभिन्न गांवों बाजारों व चौक चौराहे की बंद पड़ी उर्वरकों की दुकानों पुन: रफ्तार पकड़ने लगी है. वही यूरिया व डीएपी उर्वरको की मांग बढ़ने के कारण किसानों से अधिक मूल्य वसूल किया जा रहा है. दूसरी ओर उच्चे दाम वसूल कर नेपाली तस्करों के हाथे सीधे बॉर्डर पार कराने का धंधा शुरू हो चुका है.
जानकारी के अनुसार सीमाई क्षेत्र के हरपुर, घोड़ासहन, नकरदेई,बेलदारवा, मुर्तिया, महुआवा, सहित दर्जनो गांवो के रास्ते साइकिल व बाइक पर लदे उर्वरक की बोरियों को सीधे नेपाल जाते देखा जा रहा है. इधर बॉडर पर तैनात एसएसबी कि निष्क्रियता का भी लाभ तस्कर आराम से उठा रहे हैं.
इतना ही नहीं नेपाली निर्मित डीजल की भी तस्करी इन दिनो जोरों पर है. जिसके कारण उर्वरक ले जाने वाले तस्कर नेपाल से पुन: डीजल व पेट्रोलियम पदार्थ भी लेकर भारतीय क्षेत्रो में धडलने से आ जा रहे है. मजे की बात तो यह है कि बतौर बीएओ विवेकानन्द झा ने पुछे जाने पर बताया कि प्रखंड क्षेत्र में कुल 73 लाइसेंसी दुकाने हैं. परंतु 35 से 40 दुकानें ही धरातल पर संचालित है. अब सवाल उठता है कि क्या बगैर सत्यापन अन्य दुकानों के लाइसेंसो का रिन्यूअल भी क्यों किया जाता है. उनके द्वारा मंगाये गये उर्वरकों का भी कोई लेखा-जोखा स्थानीय कृषि कार्यालय के संज्ञान में नहीं रहती है.
ऐसे में कुछ ऐसे भी दुकानें है जिनका दुकान व गोदान की जानकारी भी विभाग के पास नहीं है. वही कृषि विभाग द्वारा समय-समय पर दुकानदारों के अरजी के अनुसार लाइसेंसों का स्थानांतरण का भी खेल निरंतर जारी रहता है. उपरोक्त तस्कारों की अगर निष्पक्ष रूप से जांच करायी जाये तो किसानों के नाम पर हकमारी होने वाले खेल में कई लोगों की सहभागिता उजागर हो सकती है. बहरहाल जो भी हो फिलहाल उर्वरक दुकानदारों के मनमानी व बेलगाम खेमें पर स्थायी सरकारी तंत्र विफल दिखाई दे रही है.
वहीं इस बावत प्रखंड कृषि पदाधिकारी विवेकानन्द झा का कहना है कि जिला से उर्वरक के आवंटन की कोई सूचना नहीं है. वही दुकानदारों के विरुद्ध किसी तरह की कोई शिकायत की सूचना भी नहीं मिलने की बात बीएओ श्री झा ने बताया.
