नेशनल हाइवे पर फेंका जा रहा कूड़ा

समस्या. मोतिहारी में कूड़ा डंपिंग के लिए जमीन खोजने में बीत गये पांच साल शहर के लिए कूड़ा निस्तारण की समस्या दिनोंदिन गंभीर होती जा रही है. एनएच किनारे हो रही कूड़ा डंपिंग से गंदगी बढ़ती जा रही है. मोतिहारी : पर्यावरण की चिंता करने वाला मोतिहारी नगर परिषद की हालत चिराग तले अंधेरे जैसी […]

समस्या. मोतिहारी में कूड़ा डंपिंग के लिए जमीन खोजने में बीत गये पांच साल

शहर के लिए कूड़ा निस्तारण की समस्या दिनोंदिन गंभीर होती जा रही है. एनएच किनारे हो रही कूड़ा डंपिंग से गंदगी बढ़ती जा रही है.
मोतिहारी : पर्यावरण की चिंता करने वाला मोतिहारी नगर परिषद की हालत चिराग तले अंधेरे जैसी है. कचरा निस्तारण मामले में नगरपालिका की कारगुजारी कुछ यही ब्यां कर रही है. पर्यावरण सुरक्षा को जन-जागरूकता चलाने वाला नगरपालिका खुद भी पर्यावरण प्रदूषण की राह पर चल रही है.
आलम यह है कि शहर के कूड़ा-कचरे की डंपिंग राष्ट्रीय राज्य मार्ग से सटे एवं रिहाइसी ईलाकों में हो रही है. लिहाजा इससे आसपास के लोगों के सेहत पर बुरा असर पड़ रहा है. वहीं पर्यावरण संरक्षण के ख्याल से भी इसे अच्छा नहीं माना जा रहा. स्थिति यह है कि अबतक कूड़ा निस्तारण को लेकर नप प्रशासन के पास कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है. पहले कूड़ा चीनी मील से सटे मोतीझील किनारे खाली जगहों में डाला जाता था. अब शहर से सटे एनएच किनारे व धनौती नदी से सटे कचहरी के पीछे खाली जगह पर डंपिंग हो रही है.
सरकारी दर पर नहीं मिल रही जमीन : कूड़ा-कचरा निस्तारण को लेकर जमीन खरीद करने के लिए कई बार विज्ञापन भी निकाले गये, लेकिन किसी भू-दाता ने जमीन तय धन राशि पर देने को तैयार नहीं हुआ. हालांकि बोर्ड की बैठक में कई बार इस मसले पर चर्चा हुई, जिसमें यह बात सामने आयी की भूमि का सरकारी दर कम होने के कारण जमीन नहीं मिल रही है.
डोर-टू-डोर अभियान पर टिकी उम्मीद: कूड़ा निस्तारण की समस्या का समाधान नगर विकास विभाग के प्रस्तावित डोर-टू-डोर कूड़ा उठाव की नयी कार्य योजना पर टिकी है. उम्मीद है कि यह सेवा नगरपालिका में शीध्र ही शुरू होगी. जिसके बाद कूड़ा डंपिंग से फैलने वाली गंदगी पर रोक लगेगा.
जमीन के अभाव में अधर में लटकी है डंपिंग यार्ड बनाने की योजना
टेंडर की प्रक्रिया जल्द
डोर-टू-डोर कूड़ा संग्रहण योजना टेंडर की प्रक्रिया में है. इस कार्य योजना के तहत चयनित एजेंसी को कार्य की जिम्मेदारी सौंपी जायेगी. संबंधित एजेंसी डोर टू डोर कूड़ा संग्रह करेगा, फिर रिसाइक्लिंग के तहत कूड़ा को उपयोग में लाया जायेगा. इससे ऑर्गेनिक खाद सहित अन्य समान बनाये जायेंगे. 21 जुलाई तक निविदा डालने की तिथि तय की गयी है, जिसके बाद निविदा की कागजी प्रक्रिया पूरी कर कार्य चयनित एजेंसी को सौंप दी जायेगी.
कुमार मंगलम, कार्यपालक पदाधिकारी, नप मोतिहारी
प्रतिमाह 25 टन निकलता है कूड़ा
आमतौर पर शहर में करीब रोजाना 70 से 80 क्विंटल कूड़ा का उठाव होता है. जिसे एनएच 28 से सटे खाली जगह एवं कचहरी के पीछे धनौती नदी से सटे खाली जगहों में डाला जाता है. ऐसे में प्रतिमाह करीब 20 से 25 टन कूड़ा जेनरेट होता है.
निस्तारण की नहीं
है व्यवस्था
शहर की साफ-सफाई में निकलने वाला कूड़ा का उठाव कर रखने की समुचित व्यवस्था तक नहीं है. फिर रिसाइक्लिंग की बात तो दूर है. कूड़ा निस्तारण को लेकर वैकल्पिक सुविधा नहीं होने से स्थिति दिनोंदिन गंभीर होती जा रही है.
2012 में बनी थी योजना
कूड़ा निस्तारण को लेकर नगर परिषद् बोर्ड ने वर्ष 2012 में कार्य योजना पर मुहर लगायी थी. योजना के तहत पहले कूड़ा डंपिंग के लिए जमीन अधिग्रहित करने का निर्णय लिया गया था. नप के संसाधनों से प्राप्त धन राशि से जमीन खरीदने का निर्णय लिया गया था, लेकिन समय बीतने के साथ वर्ष दर वर्ष कार्य योजना आगे बढ़ती गयी, लेकिन चार साल बीत जाने के बाद भी अबतक जमीन खरीद नहीं हो सकी है.

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