मोतिहारी : राष्ट्रीय आयोडीन अल्पता विकार नियंत्रण कार्यक्रम (एनआइडीडीसीपी) के बावजूद पूर्वी चंपाारण के 17.79 प्रतिशत लोग अमानक नमक का प्रयोग कर रहे हैं, जबकि मुजफ्फरपुर में यह आंकड़ा 32.09 व पश्चिमी चंपारण में 15.11 है.
इसका खुलासा एनआइडीडीसीवी के अंतर्गत तिरहुत प्रमंडल के समुदाय स्तर पर संग्रहित खाद्य नमक के नमूनों के जिलावार जांच में हुआ है. विभिन्न विद्यालय व केंद्रों से प्राप्त नमूनों की जांच पटना स्थित प्रयोगशाला में हुई. नमूनों का संग्रह ग्लोबल आयोडीन अल्पता विकार बचाव माह अक्टूबर 2017 में किया गया था. मध्याह्न भोजन और आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों भी अमानक नमक के प्रयोग से अस्वस्थ हो रहे हैं. नमूना संग्रह चंपारण के अलावा पश्चिमी चंपारण, मुजफ्फरपुर, वैशाली व सीतामढ़ी जिलों में लिया गया था. पूर्वी चंपारण में 7262 नमूनों में 192 नमूना अमानक पाया गया.
अमानक नमक से हानि : निर्देश के बाद भी जविप्र दुकानदार आयोडीन युक्त नमक के वितरण न होने और बाजार में खुले तौर पर अमानक नमक की बिक्री व प्रयोग से लोग असमय विभिन्न रोगों के शिकार हो रहे हैं. यथा बच्चों में मंदबुद्धि का होना, शरीरिक व बौद्धिक विकास में कमी, घेंघा रोग, समामयिक गर्भपात जैसी समस्याएं अमानक नमक के प्रयोग से होता है.
जरूरत है नमक सत्याग्रह की : गांधी जी आजादी के लिए चंपारण सत्याग्रह के बाद 1937 में उन्होंने देश में नमक सत्याग्रह भी किया था. आज फिर जरूरत है अमानक नमक के खिलाफ सत्याग्रह की. 1960 के सर्वेक्षण में चंपारण को घेंघाग्रस्त घोषित कर 1964 में साधारण
नमक को प्रतिबंधित कर आयोडीन युक्त नमक की बिक्री का प्रावधान किया गया है. बावजूद अमानक नमक की बिक्री व प्रयोग चिंता का विषय है.
पूर्वी चंपारण के आंकड़े
संग्रहित स्थान केंद्र की संख्या प्राप्त नमूना अमानक
स्कूली छात्र-छात्रा 103 7262 1292-17.79%
मध्याह्न भोजन 89 81 08-8.99%
आंगनबाड़ी केंद्र 91 89 02-2.20%
कस्तूरबा विद्यालय 09 09 01-11.11%
बच्चे व गर्भवती महिलाओं
के लिए चिंता का विषय
मुजफ्फरपुर में यह आंकड़ा
है 32.09 प्रतिशत
अमानक नमक से बच्चों
की बुद्धि होती है मंद
एनआइडीडीसीपी के सफल क्रियान्वयन के लिए मानक स्तरीय आयोडीन नमक सुलभ कराने की आवश्यकता है. इसकी उपलब्धता जविप्र दुकानों पर भी कराएं. इस मुतल्लिक डीएम से मंतव्य भी मांगा गया है.
भरत कुमार दूबे, सरकार के अपर सचिव
