सौ एकड़ मक्के की फसल में नहीं निकला दाना

मोतिहारी : किसान प्रलयंकारी बाढ़ में हुई बर्बादी से उबर ही रहे थे कि मक्के की बाली में दाना न देख उनकी परेशानी और बढ़ गयी है. यह स्थिति सदर प्रखंड मोतिहारी के करीब आधा दर्जन गांवों की है. सबसे ज्यादा प्रभावित टिकुलिया पंचायत के किसान हैं. लगभग 100 एकड़ भूमि में मक्का का पौधा […]

मोतिहारी : किसान प्रलयंकारी बाढ़ में हुई बर्बादी से उबर ही रहे थे कि मक्के की बाली में दाना न देख उनकी परेशानी और बढ़ गयी है. यह स्थिति सदर प्रखंड मोतिहारी के करीब आधा दर्जन गांवों की है. सबसे ज्यादा प्रभावित टिकुलिया पंचायत के किसान हैं. लगभग 100 एकड़ भूमि में मक्का का पौधा तैयार हुआ, बाली भी निकली. लेकिन बाली में एक भी दाना नहीं देख किसान कलेजा पीट रहे हैं. किसान कहते हैं कि बाबू लोग तू हे बताआव, हमनी सब का करी. सरकार सहायता न करी त हमनी सब कैसे जियम.

टिकुलिया पंचायत के वार्ड नंबर चार के किसान सुभाष राय ने बताया कि दो एकड़ मक्के की खेती की थी. करीब 50 हजार रुपये खर्च हुए. सोचा फसल अच्छी हो जायेगी, तो इसी पैसे से बेटी की शादी करेंगे, लेकिन सारे अरमानों पर पानी फिर गया. इसी प्रकार महंत राय ने बताया कि एक पैकेट बीज चार किलो का आता है, जिसकी कीमत 1460 रुपये है. किसान महंत राय, मोख्तार राय, योगिंद्र राय, जयलाल राय, नरेश राय, उमेश राय, नागेश्वर राय, परमानंद राय, छोटेलाल राय, हीरा लाल राय, शिवंश यादव ने दो एकड़ में मक्के की खेती की है. वहीं, प्रभुलाल राय, नगीना राय, जयलाल राय, राम विनय राय, उपेंद्र राय, रामनरेश राय, सच्चितानंद यादव, सत्येंद्र राय, गजेंद्र राय, प्रह्लाद
सौ एकड़ मक्के
राय, नारद राय, चंदेश्वर राय, अमरेंद्र, शिवमंगल, छोटेलाल, नवलेश, लखिंद्र, सुगांति देवी, विजय, हरिशकंर यादव, सत्यदेव यादव, कपिलदेव यादव, महिंद्र यादव ने एक एकड़ खेत में मक्के की फसल लगायी थी, लेकिन बाली नहीं आयी. कुछ इसी तरह की शिकायत सदर प्रखंड के लखौरा, बरवा, झिटकहियां, पश्चिमी ढेकहा के अलावा बंजरिया प्रखंड से भी आ रही है. इससे विभागीय अधिकारी भी इनकार नहीं करते.
तापमान का प्रभाव तो नहीं
जानकारों के अनुसार, अक्तूबर के अंतिम या नवंबर में मक्का लगाने का सही समय है. लगता है प्रभावित फसल की बुआई अक्तूबर के प्रथम सप्ताह में हुई होगी. बाली निकलने का समय दिसंबर के अंतिम व जनवरी था. उस समय अत्यधिक ठंड पड़ रही थी. कुछ दिनों तक तापमान दस डिग्री से भी नीचे आ गया था. मक्के के लिए कम से कम 10 से 14 डिग्री का तापमान होना चाहिए.
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तीन किस्म की बुआई
मक्के की खेती करने वाले किसान सह पंचायत समिति सदस्य गजेंद्र यादव, सोनू कुमार आदि ने बताया कि स्थानीय व मोतिहारी के दुकानदारों से बीज की खरीदारी की थी. इसमें संध्या, 9120 विकाल व 3396 की प्रजातियां शामिल हैं. बच्चे की तरह पौधों को खाद, पानी देकर पाला था. लेकिन, खरीफ को बाढ़ ने लील लिया तो मक्का असली-नकली के चक्कर में फंस गया.
मक्का बाली में दाना न आने की सूचना मिली है. एक सप्ताह के अंदर में वैज्ञानिकों से जांच करायी जायेगी. जांच से स्पष्ट हो जायेगा की मक्का बीज गुणवत्तापूर्ण नहीं था या कोई और कारण था. बीज दुकानदारों से भी पूछताछ की जायेगी. मामले में जो भी दोषी होंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जायेगी.
संजय कुमार, बीएओ मोतिहारी सदर

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