पूर्वी चंपारण : बिहार के लिये वह वीरप्पन था. जी हां, उसे वीरप्पन के नाम से लोग जानते थे. पश्चिम चंपारण के जिलों में वीरप्पन के नाम से कुख्यात उसका असली नाम था शेख मुस्तफा. जानकारी के मुताबिक मंगलवार की देर शाम अपराधियों ने उसकी गोली मारकर हत्या कर दी. भारत-नेपाल की सीमा पर स्थित जंगलों और आस-पास के इलाकों के लिए आतंक और दहशत का जाना-पहचाना नाम शेख मुस्तफा अपराधियों की एक गोली से ढेर हो गया. अपराधियों ने नजदीक से उसे गोली मारी. उसके बाद शेख मुस्तफा के समर्थकों ने जिले में जमकर उत्पात मचाया और तोड़फोड़ करना शुरू कर दिया.
बताया जा रहा है कि शेख मुस्तफा की हत्या के लिए मुस्तफा के कुछ पड़ोसियों को जिम्मेदार मानते हुए उनके घरों में तोड़फोड़ शुरू कर दी. बाद में सूचना के बाद जब सहोदरा थाने की पुलिस मौके पर पहुंची, तो सभी उत्पात मचाने वाले वहां से फरार हो गये. बताया जा रहा है कि शिकारपुर थाना क्षेत्र के नौतनवा गांव से दर्जनों मुस्तफा समर्थकों ने आकर उत्पात मचाया था. मुस्तफा की हत्या के बाद इलाके में तनाव कायम है, हालांकि पुलिस कैंप कर रही है.
मामले की पुलिस जांच कर रही है और स्थिति को नियंत्रण में करने के लिए परसौनी गांव में कैंप डाल कर बैठी हुई है. मामले का पता चलने के बाद एसपी जयंत कांत भी वहां पहुंचे और पूरी स्थिति का जायजा लिया. मुस्तफा का गांव सहोदरा थाना क्षेत्र के एकवा परसौनी बाजार पड़ता है. मंगलवाद देर शाम हत्या के बाद उसके समर्थकों ने बुधवार को उत्पात मचाना शुरू किया. बताया जा रहा है कि मुस्तफा पर दर्जनों आपराधिक मामले दर्ज हैं. वह इलाके का आतंक बताया जाता है.
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