मोतिहारी : लगातार गिर रहे पारा से सारा जीवन अस्त-व्यस्त है. साथ ही नवजात शिशुओं पर भी पारा गिरने के कारण संकट के बादल गहराने लगे हैं. इन शिशुओं को गर्म करने वाला वार्मर केयर भी सदर अस्पताल में कम पड़ रहा है.
सदर के एनएनसीयू में छह वार्मर केयर है, जिसमें एक खराब है. पांच वार्मरों से ही काम चल रहा है. सदर अस्पताल में अमूमन प्रत्येक दिन 20-25 बच्चे जन्म लेते है, जिसमें से अधिकांश बच्चों को वार्मर की आवश्यकता होती है लेकिन सदर अस्पताल में वार्मर केयर कम होने के कारण लोगों को बाहर के निजी नर्सिंग होम का सहारा लेना पड़ रहा है. क्या है वार्मर केयर : वार्मर केयर में बच्चों को डालते ही तापमान साढ़े 36 डिग्री सेल्सियस बढ़ जाता है. ठंड से नवजात शिशुओं को राहत मिलती है. साथ ही साथ कमजोर एवं बीमार नवजात शिशुओं को भी इसकी आवश्यकता पड़ती है.
प्रधान सचिव ने और वार्मर लगाने का दिया था निर्देश : बढ़ते ठंड को देखते हुए प्रधान सचिव आरके महाजन ने एसएनसीयू के निरीक्षण के दौरान छह और वार्मर लगाने का निर्देश सिविल सर्जन को दिया था. लेकिन एक माह बीत जाने के बाद भी एसएनसीयू में वार्मर नहीं लगा. नतीजतन सदर अस्पताल में जन्मे बच्चों को बाहर के नर्सिंग होम में भर्ती कराया जा रहा है. यहां बता दें कि गत दिसंबर माह में 29 बच्चों को वार्मर केयर में रखा गया था.
सदर अस्पताल के छह वार्मर केयर में एक हुआ खराब
दिसंबर में 29 नवजात रखे गये थे वार्मर में
ठंड में नवजात हो रहे हाइपोथोमिया के शिकार
ठंड के इस मौसम में नवजात शिशुओं में हाइपोथोमिया नामक बीमारी अधिक होती है. ऐसे में बच्चों के लिए वार्मर केयर आवश्यक है.
डाॅ अनिल कुमार सिन्हा, नोडल पदाधिकारी, एसएनसीयू, सदर अस्पताल, मोतिहारी
