Buxar News : अनुमंडल क्षेत्र के बड़कासिंहनपुरा स्थित धनईपुर और सिरीखीड़ी मौजा में जंगली सुअरों का आतंक किसानों के लिए गंभीर समस्या बन गया है. करीब दो वर्षों से 30 से 35 जंगली सुअरों का झुंड लगातार खेतों में घुसकर फसलों को बर्बाद कर रहा है. स्थिति यह है कि फसल बचाने के साथ किसानों को अब अपनी जान की भी चिंता सताने लगी है. हमले के डर से किसान अकेले खेत जाने से परहेज कर रहे हैं.
100 एकड़ खेती पर मंडरा रहा बर्बादी का खतरा
स्थानीय किसानों के अनुसार जंगली सुअरों के कारण करीब 100 एकड़ कृषि भूमि प्रभावित हो चुकी है. दिन हो या रात, सुअरों का झुंड खेतों में पहुंचकर तैयार फसलों को तहस-नहस कर देता है. किसानों का कहना है कि महंगे बीज, खाद, सिंचाई और मेहनत के बाद जब फसल तैयार होती है, तब जंगली सुअर कुछ ही समय में उसे बर्बाद कर देते हैं.
हमले के डर से समूह बनाकर खेत पहुंच रहे किसान
किसान दुर्गा ओझा, मंजी ओझा, बबलू ओझा, रामनाथ ओझा और सुनील यादव समेत दर्जनों किसानों ने बताया कि जंगली सुअरों का आतंक इतना बढ़ गया है कि अब अकेले खेत जाना मुश्किल हो गया है. जरूरत पड़ने पर किसान समूह बनाकर और पूरी सतर्कता के साथ खेतों में जाते हैं. ग्रामीणों का दावा है कि जंगली सुअर कई लोगों पर हमला कर उन्हें घायल भी कर चुके हैं.
मकई से लेकर धान और आलू तक को बना रहे निशाना
किसान रमेश ओझा ने बताया कि उन्होंने तीन बीघा में मकई की खेती की थी, लेकिन जंगली सुअरों ने पूरी फसल बर्बाद कर दी. मकई में जैसे ही बालियां निकलती हैं, सुअर उन्हें फाड़कर खा जाते हैं और फसल को रौंद देते हैं. धान की फसल को काटकर गिरा देते हैं और नीचे का डंठल खाते हैं. वहीं आलू की फसल को खेत में खोदकर नष्ट कर देते हैं.
दो साल से परेशान किसान, वन विभाग से राहत की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि जंगली सुअरों के आतंक की जानकारी कई बार वन विभाग को दी गयी, लेकिन अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ है. किसानों ने विभाग से तत्काल कार्रवाई कर जंगली सुअरों को क्षेत्र से हटाने की मांग की है. उनका कहना है कि यदि जल्द कदम नहीं उठाया गया तो बड़ी संख्या में किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा और खेती छोड़ने की स्थिति पैदा हो सकती है.
मुखिया की लिखित सूचना के बाद कार्रवाई करेगा विभाग
वन विभाग के रेंजर सुरेश कुमार ने बताया कि किसानों की सूचना के आधार पर विभाग सीधे कार्रवाई नहीं करेगा. संबंधित पंचायत के मुखिया की ओर से लिखित सूचना मिलने के बाद ही विभाग की ओर से आवश्यक कदम उठाया जायेगा. किसानों को उम्मीद है कि पंचायत स्तर से लिखित सूचना मिलने के बाद वन विभाग इस समस्या के समाधान के लिए कार्रवाई करेगा.
