Buxar Transport Corruption Case Exposed : बक्सर जिले में परिवहन विभाग के चेकपोस्ट से रिश्वत लेकर जब्त ट्रकों को छोड़ने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है. जिला परिवहन पदाधिकारी राज कुमार प्रसाद ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए नगर थाना में लिखित आवेदन देकर प्राथमिकी दर्ज करा दी है. केस दर्ज होते ही इस मामले से जुड़े कर्मियों के बीच हड़कंप मच गया है और अब पुलिस पूरे प्रकरण की जांच में जुट गई है.
जानकारी के अनुसार यह मामला चेकपोस्ट पर तैनात कर्मियों की लापरवाही और मिलीभगत से जुड़ा है, जहां जब्त किए गए ट्रकों को बिना किसी वैध प्रक्रिया के छोड़ दिया गया. इस घटना ने विभाग की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं.
Buxar News : दो अलग-अलग तारीखों पर हुई घटनाएं
आधिकारिक शिकायत के अनुसार पहला मामला 11 मई का है. उस दिन खनन विभाग ने वाहन संख्या UP53JT-8477 को जब्त कर आगे की कार्रवाई के लिए परिवहन विभाग को सौंपा था. नियम के अनुसार इस वाहन को तब तक नहीं छोड़ा जाना था जब तक जिला परिवहन कार्यालय से विधिवत रिलीज ऑर्डर जारी न हो. लेकिन आश्चर्यजनक रूप से बिना किसी आदेश के ही इस ट्रक को चेकपोस्ट से छोड़ दिया गया.
वहीं दूसरा मामला 13 मई की आधी रात का है. चलंत दस्ता के सिपाहियों ने ओवरलोड ट्रक UP22BT-4587 को पकड़कर चेकपोस्ट पर खड़ा कराया था. लेकिन यहां भी लापरवाही की हद पार हो गई. चेकपोस्ट पर तैनात गृहरक्षकों की मौजूदगी के बावजूद यह ट्रक सुबह होते-होते रहस्यमय तरीके से गायब हो गया.
Buxar Transport Department : जांच में रिश्वतखोरी का खुलासा
लगातार दो मामलों में ट्रकों के गायब होने के बाद जिला प्रशासन ने इसे गंभीरता से लिया और विशेष जांच दल का गठन किया. जांच के दौरान जो तथ्य सामने आए, वे चौंकाने वाले थे. टीम ने पाया कि ड्यूटी पर मौजूद कर्मियों या किसी अज्ञात व्यक्ति ने करीब 15 हजार रुपये की रिश्वत लेकर इन वाहनों को अनाधिकृत रूप से वहां से भगा दिया.
इस खुलासे के बाद विभाग ने संबंधित कर्मियों से स्पष्टीकरण मांगा, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर मामला और गंभीर हो गया. अंततः जिला परिवहन पदाधिकारी ने कानूनी कार्रवाई का रास्ता अपनाया.
पुलिस ने कसा शिकंजा
इस पूरे मामले में नगर थाना के थानाध्यक्ष मनोज कुमार सिंह ने पुष्टि की है कि डीटीओ के आवेदन के आधार पर संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है. उन्होंने बताया कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है और दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.
बक्सर का यह मामला न सिर्फ विभागीय लापरवाही बल्कि भ्रष्टाचार की गहरी जड़ें भी उजागर करता है. अगर चेकपोस्ट जैसे संवेदनशील स्थान पर इस तरह की घटनाएं होती हैं, तो यह कानून व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है. अब सभी की नजर पुलिस जांच पर टिकी है कि दोषियों पर कितनी सख्त कार्रवाई होती है और क्या इस तरह की घटनाओं पर लगाम लग पाती है.
