Buxar News : सूखने लगे ताल-तलैया, प्यास बुझाने को भटक रहे जीव-जंतु

बढ़ रहे तापमान का सीधा असर नदियों और तालाबों पर दिखने लगा है. धरती की कोख सूखने के साथ ही नदी अपने अस्तित्व के लिए जूझ रही हैं.

ब्रह्मपुर. बढ़ रहे तापमान का सीधा असर नदियों और तालाबों पर दिखने लगा है. धरती की कोख सूखने के साथ ही नदी अपने अस्तित्व के लिए जूझ रही हैं. हालात यह हैं कि सिर्फ बारिश के दिनों में इन नदियों में पानी दिखता है. भले ही मनरेगा योजना से एक पंचायत में दर्जनों आहर पोखर की खुदाई हुई हो, लेकिन पानी का कहीं नामोनिशान नहीं है. पानी के लिए जंगली जीवों को भटकते देखा जा रहा है.

अतिक्रमण से नदियों व तालाबों के अस्तित्व पर संकट

तालाबों की दशा भी किसी से छिपी हुई नहीं है. अतिक्रमण की जद में आकर तमाम तालाब पहले ही खत्म हो चुके हैं. मनरेगा के तहत गांवों में होने वाली तालाबों की खोदाई के नाम पर भी औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं. खतरा बढ़ता जा रहा है और इससे निबटने के लिए ठोस प्रयास हो ही नहीं रहे. गिरते भू-गर्भ जल स्तर की हालत किसी से छिपी नहीं है. तालाबों की खुदाई कर बारिश का जल संचय करने की योजना. किसी का भी क्रियान्वयन सही ढंग से नहीं हो सका. परिणाम स्वरूप नदियों का प्रवाह भी खत्म होने लगा है. बावजूद इसके स्थिति में सुधार के लिए कुछ नहीं हो रहा

नाले में तब्दील हुई धर्मवती नदी

प्रदूषण के संकट से नदी का दायरा काफी सिमट गया गया. गरहथा, बलुआ तथा देवकुली गांव तक नदी अभी ही सूख कर नाले में तब्दील हो गई है. यही स्थिति गंगा के भागड़ का है. मेन गंगा छाड़न से चक्की के शिवपुर दियर से गंगा का भागड़ से निकलकर प्रखंड के सीमावर्ती क्षेत्र धर्मागतपुर गांव के पास बांध पर समाप्त हो जाता है. मुख्यतः चक्की तथा ब्रह्मपुर प्रखंड में बहने वाली नदी चंद्रपुरा गांव से आगे सुख गई है. यह नदी भी नाला बन गई.

मिट्टी का कटाव नहीं रुकने से नदी व जलीय जीव पर संकट

इन नदियों के किनारे पेड़ पौधे नहीं होने के कारण बरसात के मौसम में मिट्टी, गाद, रेत तथा अवशिष्ट पदार्थ बहकर नदियों में जमा हो जाते हैं. मिट्टी का कटान नहीं रुकने के कारण नदियों का गर्भ गृह भर गया. इसके अलावा विभिन्न मूर्तियों के विसर्जन तथा संस्कार से नदियां भर रही है और रेत से भरी हुई नदियों की जल संग्रह समाप्त हो गई. नदियों के सूखने से जैव विविधता नष्ट होने के कारण पर्यावरण बिगड़ रहा है. अपशिष्ट पदार्थ डालने से नदियों के पानी में कार्बनिक पदार्थ बढ़ जाते हैं. ऑक्सीजन की कमी होने से जलीय जीव मर जाते हैं जानकार बताते हैं कि नदियों के पानी प्रदूषित होने तथा सूखने के कारण कई जीवों की प्रगति समाप्त हो गयी. इन नदियों में 12 प्रकार की मछलियां पायी जाती थी. जिसमें से छह प्रकार की मछलियों के साथ कछुआ घड़ियाल आदि प्रजाति समाप्त हो गयी. यह दोनों नदियां दियारा क्षेत्र के कृषि तथा रोजगार के साधन हैं. इन नदियों को सूखने से दोनों पर संकट आ गया है. इसके अलावे मुंडन, शवदाह गंगा स्नान आदि प्राचीन परंपराओं पर भी संकट आ गया है. कुल मिलाकर सूखती हुई नदियों प्रकृति और जीवन के विविध वजूद को मिटा रही है.

इन जगहों से होकर गुजरती है धर्मवती नदी

पर्यावरण प्रदूषण की खतरनाक स्थिति के कारण और नदियां भी सूखने लगी है. सूखी नदियों से जैव विविधता कृषि रोजगार और मानवीय जीवन की परंपराओं का वजूद भी मिटने जा रहा है. ब्रह्मपुर प्रखंड में बहने वाली धर्मावती तथा गंगा का भागड़ नामक नदियों के लगातार नाली बनकर सूख जाने से स्थिति भयावह होती जा रही है. काव नदी के छारन से निकली हुई धर्मावती नदी गायघाट, चक्की निमेज होते हुए भोजपुर जिले में फ्री त्रिभुवानी के पास गंगा में मिल जाती है.

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Author: ALOK KUMAR

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