दोपहर में धूप होने के बावजूद ठंड से नहीं मिली राहत, तेज पछुआ हवा के कारण शीतलहर कायम

जिले में ठंड का कहर बुधवार को भी जारी रहा. बुधवार को न्यूनतम एवं अधिकतम तापमान में काफी गिरावट दर्ज की गयी है.

बक्सर.

जिले में ठंड का कहर बुधवार को भी जारी रहा. बुधवार को न्यूनतम एवं अधिकतम तापमान में काफी गिरावट दर्ज की गयी है. वहीं मंगलवार को जिले में न्यूनतम तापमान जहां नौ डिग्री सेल्सियस था जो बुधवार को तीन डिग्री सेल्सियस की गिरावट के साथ ही छह डिग्री सेल्सियस एवं अधिकतम तापमान 18 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. वहीं जिले में बुधवार को दोहपर बाद में सूर्य की रोशनी लोगों को दीदार हुआ. इसके साथ ही तेज पछुआ हवा के कारण ठंड में कोई राहत महसूस नहीं हुई. जिले में ठंड से लोगों का जन जीवन प्रभावित हो गया है. जिले में न्यूनतम तापमान छह डिग्री सेल्सियस एवं अधिकतम तापमान 18 डिग्री सेल्सियस बना रहा. जिसके कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. इसके साथ ही तेज हवा के कारण जिले मे शीतलहर का प्रभाव काफी बढ़ गया है. दोपहर में धूप होने के बाद भी लोगों को गर्माहट महसूस नहीं हुई बल्कि तेज वर्फीली हवा गर्म कपड़ों को छेदते हुए शरीर में कंपकपी पैदा कर रहा है. ठंड एवं शीतलहर के कारण सड़कें सूनसान बनी रही. एनएच-922 पर भी छोटे वाहनों का आवागमन अपेक्षाकृत कम बना रहा. हालांकि बुधवार को बादल होने के कारण कोहरे का प्रभाव नहीं दिखा. इसके साथ ही तेज पछुआ हवा के शुरू होने के बाद बादल का प्रभाव कम हुआ और सूर्य की रोशनी लोगों को नसीब हो पायी. लेकिन सूर्य की रोशनी की गर्माहट लोगों को ठंड से राहत नहीं दिला पाया. जिसके कारण लोग अपने घरों में ही दुबक गये है. न्यूनतम व अधिकतम तापमान आगे भी इसी तरह की ठंड बने रहने की संभावना है. शीतलहर के कारण रबी फसलों पर बुरा प्रभाव पड़ने की संभावना बढ़ गई है. ज्ञात हो कि जिले में लगभग पिछले 10 दिनों से तापमान में आई कमी से जिले वासी ठंड से जूझ रहे है. वहीं गुरुवार को न्यूनतम तापमान छह डिग्री सेल्सियस एवं अधिकतम 20 डिग्री सेल्सियस बने रहने की संभावना है. ठंड के कारण ट्रेनों के परिचालन पर भी असर पड़ा है. सभी महत्वपूर्ण ट्रेनों का परिचालन घंटों लेट से हो रहा है. जिससे यात्रियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

बच्चे व बुर्जुगों की बढ़ी परेशानी :

ठंड के कारण बच्चे एवं बुर्जुगों की परेशानी सबसे अधिक बढ़ गयी है. इनका बचाव शीतलहर से आवश्यक हो गया है. ज्यादातर बच्चों को श्वसनतंत्र से जुड़ीं बीमारियाें का खतरा बढ़ गया है. शुरूआत में बच्चे मामूली सर्दी से पीड़ित होते हैं. सर्दी होने पर डॉक्टर से सलाह लें. अगर समय पर ध्यान न दिया जाए तो वे निमोनिया की चपेट में आ सकते है. इस मौसम में बच्चों को सर्दी से बचाना जरूरी है. उन्हें पूरे कपड़े पहनाएं, ठंडी हवा से बचाएं, यदि परिवार में किसी को सर्दी या खांसी है तो बच्चों को उस व्यक्ति के संपर्क में आने से बचाना आवश्यक है. वहीं बुर्जुगों को भी ठंड से श्वसन संबंधित बीमारी होने की संभावना बढ़ गयी है. इसके साथ ही सुगर एवं बीपी के मरीजों को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है. हार्ट अटैक जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है.

अलाव के सहारे बिता दिन :

बढ़ते जा रहे ठंड से बचाव को लेकर अलाव का सहारा लोगों का बना हुआ है. जिले में न्यूनतम तापमान में काफी गिरावट एवं शीतलहर का प्रभाव कायम हो गया है. घरों में भी लोगों को ठंड से राहत नहीं मिल पा रही है. लोग ठंड से राहत को लेकर अलाव का सहारा ले रहे हैंं.

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