जिले में कृषि कनेक्शन के लिए लगे 2116 मीटर खराब, विभाग नहीं ले रहा रुचि

जिले में कृषि कनेक्शन पर लगे बिजली मीटरों की स्थिति बेहद चिंताजनक है.

बक्सर. जिले में कृषि कनेक्शन पर लगे बिजली मीटरों की स्थिति बेहद चिंताजनक है. आधे से अधिक मीटर खराब पड़े हैं, लेकिन बिजली विभाग और मीटर एजेंसी इस गंभीर समस्या को लेकर कोई ठोस पहल करती नहीं दिख रही है.नतीजा यह है कि जहां एक ओर किसानों और कृषि उपभोक्ताओं को औसत बिल का अतिरिक्त बोझ झेलना पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर विभाग को भी राजस्व का भारी नुकसान पहुच रहा है. विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में कुल उपभोक्ताओं की संख्या 3 लाख 21 हजार 638 है, जिनमें 24 हजार 678 कृषि कनेक्शन शामिल हैं. इन कृषि कनेक्शनों में से 19 हजार 280 कनेक्शन ऐसे हैं, जिनका उपयोग केवल सिंचाई कार्य के लिए किया जाता है. उस उपभोक्ताओं से फिक्स चार्ज लिया जाता. वहीं 5 हजार 398 कृषि कनेक्शन ऐसे हैं, जिनसे कृषि के साथ-साथ अन्य कार्य भी किए जाते हैं. सबसे गंभीर स्थिति इन्हीं कनेक्शनों की है, क्योंकि इनमें से 2 हजार 116 उपभोक्ताओं के मीटर खराब है. मीटर खराब होने की स्थिति में विभाग द्वारा उपभोक्ताओं से वास्तविक खपत के आधार पर नहीं, बल्कि औसत बिल के आधार पर राशि वसूली जाती है. यही वजह है कि किसानों और उपभोक्ताओं में गहरा असंतोष देखने को मिल रहा है. उपभोक्ताओं का कहना है कि खरीफ और गरमा सीजन में सिंचाई के कारण बिजली की खपत अधिक होती है, लेकिन मीटर खराब होने के कारण उस समय भी औसत बिल ही थमा दिया जाता है. इससे विभाग को वास्तविक खपत से कम राजस्व मिलता है. वहीं दूसरी ओर जब रबी सीजन या अन्य समय में सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती और बिजली का उपयोग लगभग शून्य रहता है, तब भी उपभोक्ताओं को औसत बिल का भुगतान करना पड़ता है. इस स्थिति में सीधा नुकसान किसानों को उठाना पड़ रहा है. किसानों का कहना है कि अगर मीटर सही तरीके से कार्य करें तो उन्हें केवल वास्तविक खपत का ही भुगतान करना पड़ेगा. सबसे खराब है कोरानसराय सब-डिवीजन में : सबसे अधिक खराब मीटर कोरान सराय सब-डिवीजन में पाए गए हैं.विभागीय आंकड़ों के अनुसार इस सब-डिवीजन में करीब 2 हजार कृषि मीटर लगे हैं, जिनमें से लगभग एक हजार 500 मीटर खराब हैं. यानी करीब 75 प्रतिशत मीटर काम नहीं कर रहे हैं. यह आंकड़ा विभागीय कार्यशैली पर कई सवाल खड़े करता है. उपभोक्ताओं का आरोप है कि जिले में कुल 5 सब-डिवीजन और 18 सेक्शन हैं. यदि प्रत्येक सेक्शन में प्रतिदिन मात्र 400 से 500 मीटर भी बदले जाएं, तो एक महीने के भीतर सभी खराब मीटर बदले जा सकते हैं. इसके बावजूद न तो विभाग स्तर पर कोई ठोस योजना बनाई जा रही है और न ही मीटर बदलने वाली एजेंसी सक्रियता दिखा रही है. शिकायत करने के बाद भी नहीं बदलता है मीटर : बोकसा के किसान ब्रजेश कुमार ने बताया कि कई बार शिकायत दर्ज कराने के बावजूद केवल आश्वासन ही मिलता है. महीनों बीत जाने के बाद भी मीटर बदले नहीं जाते. इससे न केवल किसानों का आर्थिक नुकसान हो रहा है, बल्कि विभाग की छवि भी प्रभावित हो रही है. कुछ उपभोक्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि मीटर खराब होने के नाम पर विभागीय कर्मियों द्वारा मनमानी बिलिंग की जाती है. पप्पू यादव ने कहा कि यदि समय रहते मीटर बदले जाएं और स्मार्ट मीटर या सही कार्यशील मीटर लगाए जाएं, तो विभाग को वास्तविक खपत के अनुसार राजस्व मिलेगा और उपभोक्ताओं को भी राहत मिलेगी. साथ ही बिजली चोरी पर भी नियंत्रण संभव हो सकेगा. इस पूरे मामले में सबसे हैरानी की बात यह है कि समस्या लंबे समय से चली आ रही है, लेकिन विभागीय स्तर पर इसे प्राथमिकता नहीं दी जा रही. नतीजतन, हर सीजन में वही समस्या दोहराई जाती है. क्या कहते हैं अधिकारी कृषि क्षेत्र में खराब मीटर को बदलने का प्रकिया को किया जा रहा है इसके लिए मीटर एजेंसी को निर्देश दिया गया है कि हर हाल में खराब मीटर बदले साथ ही साथ निर्देश दिया गया है कि जहां पर मीटर नहीं है जल्द से जल्द मीटर लगाकर विभाग को सूचना दे. सूर्य प्रकाश सिंह, कार्यपालक अभियंता, विद्युत विभाग किस सब डिवीजन में कितना है कनेक्शन और कितना है खराब मीटर सब डिवीजन कृषि कनेक्शन खराब मीटर बक्सर शहरी 32 1 बक्सर ग्रामीण 752 172 इटाढ़ी 1578 292 डुमरांव 967 150 कोरान सराय 2069 1501

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By AMLESH PRASAD

AMLESH PRASAD is a contributor at Prabhat Khabar.

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