बक्सर: 100 वर्ष की तपस्या के बाद ब्रह्मलीन हुए दंडी स्वामी देवानंद सरस्वती, वैदिक मंत्रों के बीच दी गई जल समाधि

बक्सर में शतायु संत परम पूज्य श्री श्री 108 ब्रह्मलीन दंडी स्वामी देवानंद सरस्वती जी महाराज को रविवार को वैदिक रीति-रिवाज के साथ जल समाधि दी गई. उनका जीवन सनातन धर्म और मानव कल्याण के लिए समर्पित रहा.

Buxar News : शतायु संत परम पूज्य श्री श्री 108 ब्रह्मलीन दंडी स्वामी देवानंद सरस्वती जी महाराज को रविवार को पूरे वैदिक रीति-रिवाज, मंत्रोच्चारण और संत परंपरा के अनुरूप श्रद्धापूर्वक जल समाधि दी गई. राजगुरु मठ शिवाला घाट वाराणसी के अध्यक्ष एवं महंत तथा स्वामी सहजानंद सरस्वती आश्रम बक्सर से जुड़े पूज्य गुरुदेव की अंतिम यात्रा में श्रद्धा, भक्ति और भावनाओं का अद्भुत संगम देखने को मिला.

सनातन धर्म और मानव कल्याण के लिए समर्पित रहा जीवन

श्रद्धांजलि सभा में वक्ताओं ने कहा कि दंडी स्वामी देवानंद सरस्वती जी महाराज का पूरा जीवन सनातन वैदिक धर्म की रक्षा, वेद-शास्त्रों के प्रचार-प्रसार, तप, त्याग, साधना, राष्ट्र सेवा और मानव कल्याण के लिए समर्पित रहा. उन्होंने अपने आध्यात्मिक ज्ञान और विचारों से असंख्य शिष्यों एवं श्रद्धालुओं को धर्म, सेवा, सदाचार और आध्यात्मिक जीवन का मार्ग दिखाया.

वक्ताओं ने कहा कि उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणास्रोत बना रहेगा. उनकी शिक्षाएं और धार्मिक विचार समाज को नई दिशा देते रहेंगे.

वैदिक मंत्रों और जयघोष के बीच निकली अंतिम यात्रा

पूज्य गुरुदेव की अंतिम यात्रा सुबह 11 बजे धार्मिक गरिमा और संत परंपरा के साथ शुरू हुई. यात्रा में बड़ी संख्या में संत-महात्मा, ब्रह्मचारी, शिष्यगण और श्रद्धालु शामिल हुए. इस दौरान श्रद्धालु "ॐ नमो नारायणाय" और "हर-हर महादेव" के जयघोष के साथ वैदिक मंत्रों का उच्चारण करते हुए आगे बढ़े.

मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर अपने पूज्य गुरुदेव को भावभीनी विदाई दी. पूरे क्षेत्र में आध्यात्मिक माहौल बना रहा और भक्तों की आंखें नम दिखीं.

तीन अगस्त को होगा विशाल भंडारा, एक हजार भक्त होंगे शामिल

स्वामी सहजानंद सरस्वती आश्रम के प्रबंधक ने बताया कि आगामी 3 अगस्त को आश्रम परिसर में विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा. इसमें करीब एक हजार श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है. भंडारे को लेकर आश्रम में तैयारियां शुरू कर दी गई हैं.

कई संत-महात्मा रहे मौजूद

जल समाधि कार्यक्रम में दंडी स्वामी परमात्मानंद सरस्वती, दंडी स्वामी शिवानंद सरस्वती, दंडी स्वामी शिवशंकरानंद सरस्वती, दंडी स्वामी अनंतानंद सरस्वती, जगद्गुरु त्रिदंडी स्वामी गंगापुत्र लक्ष्मी नारायण, दंडी स्वामी शारदानंद सरस्वती, दंडी स्वामी गणेशनंद सरस्वती सहित कई संत-महात्मा और श्रद्धालु मौजूद रहे.

आध्यात्मिक जगत में छोड़ी अमिट छाप

शिष्यों और श्रद्धालुओं ने कहा कि दंडी स्वामी देवानंद सरस्वती जी महाराज ने अपना पूरा जीवन धर्म, अध्यात्म और मानव सेवा को समर्पित कर दिया. उनकी साधना, त्याग और आध्यात्मिक विचार हमेशा समाज को प्रेरणा देते रहेंगे.


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Author: Parshant kumar rai

Published by: Vivek Singh

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