Buxar News: बक्सर लोकसभा क्षेत्र में खराब ट्रांसफार्मरों को समय पर नहीं बदले जाने से किसानों की बढ़ती परेशानी को लेकर सांसद सुधाकर सिंह ने बिजली विभाग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. धान की बुआई और सिंचाई के बीच ट्रांसफार्मर बदलने में 20 से 30 दिन की देरी पर नाराजगी जताते हुए उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप और पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है.
पटवन के समय ट्रांसफार्मर बदलने में हो रही भारी देरी
सांसद सुधाकर सिंह ने अपने पत्र में कहा कि धान की खेती के सबसे महत्वपूर्ण समय में खराब कृषि ट्रांसफार्मरों को बदलने में 20 से 30 दिन का समय लग रहा है. इससे किसानों की फसल प्रभावित हो रही है. उन्होंने कहा कि यदि पटवन के मौसम में भी ट्रांसफार्मर बदलने में महीनों लग जाएं, तो यह व्यवस्था किसानों के हित में नहीं बल्कि उनके खिलाफ खड़ी नजर आती है.
'किसान बिजली नहीं, अपनी फसल बचाने का अधिकार मांग रहे'
मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में सांसद ने कहा कि किसान केवल बिजली की आपूर्ति नहीं, बल्कि अपनी मेहनत और फसल बचाने का अधिकार मांग रहे हैं. उन्होंने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी सिर्फ नियम बनाने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उनका पालन सुनिश्चित करने और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई करने की भी होनी चाहिए.
72 घंटे का नियम, लेकिन बक्सर में हो रहा उल्लंघन
सांसद ने कहा कि बिहार विद्युत कंपनियों के नियमों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में खराब ट्रांसफार्मर 72 घंटे और शहरी क्षेत्रों में 24 घंटे के भीतर बदला जाना अनिवार्य है. इसके बावजूद बक्सर में इन नियमों का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है. समय पर ट्रांसफार्मर नहीं बदलने से किसानों की फसलें सूख रही हैं और उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है.
आरा भेजे जा रहे ट्रांसफार्मरों पर उठाए सवाल
सुधाकर सिंह ने बक्सर के ट्रांसफार्मर रिपेयर वर्कशॉप (TRW) की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि बक्सर के खराब ट्रांसफार्मरों को मरम्मत के लिए पहले आरा भेजा जाता है और फिर वापस बक्सर लाया जाता है. डिजिटल युग में इस तरह की व्यवस्था सरकारी धन की अनावश्यक बर्बादी है. उन्होंने पूछा कि आखिर यह प्रक्रिया किस अधिकारी की अनुमति से संचालित की जा रही है.
मुख्यमंत्री से की ये प्रमुख मांगें
सांसद ने मुख्यमंत्री से मांग की कि सभी खराब ट्रांसफार्मरों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर बदला जाए. सिंचाई के मौसम को देखते हुए विशेष आपातकालीन व्यवस्था लागू की जाए. साथ ही, ट्रांसफार्मरों को आरा भेजने और वापस लाने की पूरी प्रक्रिया की उच्चस्तरीय जांच कर दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित की जाए.
