डुमरांव (बक्सर). भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय, विकास आयुक्त हस्तशिल्प कार्यालय, हस्तशिल्प सेवा केंद्र पटना के सौजन्य से शनिवार को डुमरांव स्थित रॉयल बैंक्वेट एंड रेस्टोरेंट में शिल्पियों के लिए एक दिवसीय सेमिनार एवं कार्यशाला का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का शुभारंभ जिला पार्षद अरविन्द प्रताप शाही ने दीप प्रज्वलित कर किया. इस अवसर पर सहायक निदेशक हस्तशिल्प मुकेश कुमार ने शिल्पियों को संबोधित करते हुए वस्त्र मंत्रालय की विभिन्न योजनाओं जैसे प्रशिक्षण कार्यक्रम, डिजाइन कार्यशालाएं, विपणन के लिए मेले, पेंशन योजना, राज्य एवं राष्ट्रीय पुरस्कार की विस्तार से जानकारी दी. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का उद्देश्य पारंपरिक शिल्प को सशक्त करना और शिल्पकारों को आत्मनिर्भर बनाना है. सेमिनार में विशेष रूप से शिल्प उत्पादों के निर्यात प्रक्रिया, ब्रांड निर्माण, डिजिटल मार्केटिंग, जीआइ एक्ट और इ-कॉमर्स प्लेटफार्म की उपयोगिता पर विस्तार से चर्चा हुई. जीआइ एक्ट के अथॉराइज्ड यूजर राजीव झा ने शिल्पियों को जागरूक करते हुए बताया कि भौगोलिक संकेत पंजीकरण से शिल्प उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलती है और इससे शिल्पकारों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है. वहीं, एम्पैनल्ड डिज़ाइनर अखिलेश ने डिजाइन और नवाचार के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि आज के प्रतिस्पर्धी बाजार में शिल्प उत्पाद तभी सफल होंगे जब उनमें पारंपरिकता के साथ आधुनिकता का मेल होगा. प्रोजेक्ट मैनेजर अरुण प्रकाश त्रिपाठी ने बिहार सरकार, उद्योग विभाग एवं जिला उद्योग केंद्र की योजनाओं की जानकारी दी. उन्होंने शिल्पकारों को आश्वस्त किया कि सरकार हर स्तर पर उनकी मदद के लिए तत्पर है. इसके साथ ही जॉइंट कमिश्नर, जीएसटी श्री तेजकांत झा ने शिल्पकारों को जीएसटी से संबंधित लाभों और योजनाओं के बारे में जानकारी दी. उन्होंने कहा कि शिल्पकार यदि विधिवत पंजीकृत हों तो उन्हें कर प्रणाली से सीधे लाभ मिलेगा और बाजार में उनकी विश्वसनीयता बढ़ेगी. स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता श्री प्रदीप शरण ने डुमरांव क्षेत्र में हस्तशिल्प के अपार संभावनाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यदि सही दिशा में प्रयास हो तो डुमरांव के शिल्पकार न केवल बिहार बल्कि देश और विदेश में अपनी पहचान बना सकते हैं. कार्यशाला में कुल 50 शिल्पियों ने सक्रिय भागीदारी की और विभिन्न विषयों पर अपने विचार साझा किया. कार्यक्रम ने न केवल शिल्पकारों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोले, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनने की राह भी दिखायी.
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