केसठ में शवदाह स्थल की जमीन पर गोदाम निर्माण का विरोध, दूसरी जगह भूमि देने की मांग

बक्सर के केसठ में प्रस्तावित गोदाम निर्माण को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। जिस जमीन को गोदाम के लिए चुना गया है, उसका इस्तेमाल वर्षों से एक विशेष समुदाय शवदाह के लिए कर रहा है। स्थानीय लोगों ने निर्माण का विरोध करते हुए वैकल्पिक भूमि की मांग की है।

Buxar News : बक्सर जिले के केसठ प्रखंड के रामपुर पंचायत में प्रस्तावित 1000 एमटी क्षमता वाले गोदाम निर्माण को लेकर विवाद गहराता जा रहा है. जिस जमीन पर गोदाम बनाने की तैयारी चल रही है, उसी को लेकर अब स्थानीय स्तर पर विरोध शुरू हो गया है. पैक्स अध्यक्ष अंगद सिंह ने इस मामले को गंभीर बताते हुए जिला सहकारिता पदाधिकारी को पत्र लिखकर आपत्ति दर्ज कराई है. उनका कहना है कि चयनित जमीन कोई सामान्य भूमि नहीं, बल्कि वर्षों से एक खास समुदाय के शवदाह स्थल के रूप में उपयोग होती रही है.

जमीन को लेकर क्यों बढ़ा विवाद

मामले की जड़ उस जमीन से जुड़ी है जिसे गोदाम निर्माण के लिए चिन्हित किया गया है. अंगद सिंह के अनुसार, यह भूमि करीब 100 वर्षों से अनुसूचित जाति के रविदास समुदाय द्वारा शवदाह के लिए इस्तेमाल की जा रही है. ऐसे में वहां गोदाम निर्माण कराना न सिर्फ परंपराओं के खिलाफ होगा, बल्कि इससे सामाजिक तनाव भी पैदा हो सकता है.

उन्होंने अपने पत्र में साफ तौर पर लिखा है कि अगर इस जगह पर निर्माण कार्य शुरू होता है तो इससे एक विशेष समुदाय की धार्मिक और सामाजिक भावनाओं को ठेस पहुंचेगी. यही वजह है कि उन्होंने समय रहते इस पर रोक लगाने की मांग की है.

प्रशासन को भेजा गया पत्र

पैक्स अध्यक्ष ने जिला सहकारिता पदाधिकारी, बक्सर को लिखे पत्र में इस पूरे मामले की जानकारी विस्तार से दी है. उन्होंने अंचल कार्यालय केसठ द्वारा उपलब्ध कराई गई जमीन पर पुनर्विचार करने की अपील की है. उनका कहना है कि बिना स्थानीय स्थिति को समझे इस तरह का फैसला लेना आगे चलकर विवाद का कारण बन सकता है.

पत्र में यह भी कहा गया है कि प्रशासन को संवेदनशील मुद्दों पर विशेष सावधानी बरतनी चाहिए ताकि किसी भी समुदाय की भावनाएं आहत न हों.

वैकल्पिक जमीन की मांग तेज

इस पूरे विवाद के बीच अब सबसे बड़ी मांग यह उठ रही है कि गोदाम निर्माण के लिए दूसरी जगह का चयन किया जाए. अंगद सिंह ने सुझाव दिया है कि पंचायत भवन के पास या किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर जमीन उपलब्ध कराई जाए, जहां बिना किसी विवाद के निर्माण कार्य कराया जा सके.

उनका कहना है कि गोदाम बनना जरूरी है, क्योंकि इससे किसानों और स्थानीय लोगों को फायदा होगा, लेकिन इसके लिए ऐसी जमीन चुनी जानी चाहिए जहां किसी तरह का सामाजिक या धार्मिक विवाद न हो.

आगे क्या होगा

फिलहाल यह मामला जिला प्रशासन के पास पहुंच चुका है और अब सबकी नजर इस पर टिकी है कि प्रशासन क्या फैसला लेता है. अगर समय रहते इस पर उचित कदम नहीं उठाया गया तो यह विवाद और भी बढ़ सकता है.

उम्मीद की जा रही है कि प्रशासन इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए ऐसी जमीन का चयन करेगा जिससे विकास कार्य भी जारी रहे और किसी भी समुदाय की भावनाएं आहत न हों.


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By Girish divedi

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