नया भोजपुर थाने में जान हथेली पर रखकर पुलिसकर्मी निभाते हैं अपना फर्ज
एनएच 922 के किनारे नया भोजपुर थाने का भवन अति जर्जर हो चुका है. इस थाने की पुलिसकर्मी जान हथेली पर रखकर अपनी ड्यूटी निभाते हैं.
By AMLESH PRASAD |
October 6, 2025 6:07 PM
डुमरांव. एनएच 922 के किनारे नया भोजपुर थाने का भवन अति जर्जर हो चुका है. इस थाने की पुलिसकर्मी जान हथेली पर रखकर अपनी ड्यूटी निभाते हैं. सात माह पहले ही थाना को नए भवन बनाने के लिए विभागीय प्रक्रिया पूरी कर ली गयी थी. लेकिन विडंबना यह है कि आज तक थाना के भवन नसीब नहीं हुआ. विभागीय आदेश के बाद मार्च महीने में ही मिट्टी जांच कराने के लिए गया था, लेकिन आज तक भवन निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ. थाने का भवन इतना जर्जर हो चुका है कि कभी भी हादसा हो सकता है. छत का सेलिंग टुट कर गिर चुका है. छत पर लगे बीम भी नीचे के तरफ दब गया है, चारों तरफ की पलस्तर टूट कर गिर गया है. सेलिंग में हर तरफ केवल सरिया ही दिख रहा है. यह केवल एक रूम की बात नहीं है बल्कि पूरे भवन की यही स्थिति है. यहां पर दूसरे को सुरक्षा देने वाले खुद असुरक्षित है. हादसे की डर से पुलिसकर्मी रात में सो नही पाते हैं.
सरकार जहां एक तरफ सुरक्षाकर्मियों के लिए मॉडल थाना बनाने की बात कह रही है, वहीं दूसरे तरफ नया भोजपुर थाने का भवन इसका उदाहरण है. भवन इतने जर्जर अवस्था में पहुंच चुका है, कि जान जोखिम में डालकर यहां की पुलिसकर्मी अपने कर्तव्य को निर्वाहन कर रहे है.
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विभागीय आदेश भी ठंडे बस्ते में : बताते चले की मार्च महीने में ही थाने को नय भवन बनाने के लिए स्थल चयनित तथा मिट्टी जांच कराई गई थी. लेकिन उसके बाद मामला अभी तक ठंढे बस्ते में पड़ा है. हैरानी की बात यह है कि कई बार विभागीय अधिकारियों को इस समस्या से अवगत कराया गया फिर भी मामला अभी अधर में ही लटका है.
थाना परिसर में है कमरा तीन : थाना परिसर के अंदर कमरे मात्र तीन हैं, जिसमें से एक कमरे में थाना संचालित होता है तो वही, दूसरे कमरे में करीब 21 के संख्या में पुलिसकर्मी रहते है, एवं तीसरे कमरे को मालखाना के रूप में यूज किया जाता है. बरामदे व घर का प्लास्टर टूट कर गिर रहा है. हैरानी की बात यह है कि इस थाने पर विभागीय अधिकारियों की नजर ही नहीं पड़ रहा है.
पूरे भवन जर्जर, कही भी सुरक्षित नहीं : इस भवन में कमरे तीन हैं और एक बरामदा भी हैं लेकिन तीनों कमरे व बरामदा का हाल अति दयनीय हो चुका हैं. एक कमरे में थाने का काम चलता है, दूसरे कमरे में लगभग 21 की संख्या में पुलिसकर्मी रहते हैं. तीसरे कमरे को मालखाना बनाया गया है. लेकिन कोई कमरा या कोई कोना सुरक्षित नहीं है. कुछ पुलिसकर्मियों का कहना था कि एक बार हमलोग सोए थे, तभी ऊपर से भारभराकर सेलिंग टूट कर गिरने लगी. जैसे तैसे भाग कर जान बचाए. उसमें दो पुलिसकर्मी हल्का फुल्का चोटिल भी हुए थे.
थाना भवन में हाजत नही : इस थाने में हाजत नहीं है, थाने में हाजत नहीं होने के कारण कैदी भी पुलिस कर्मी के साथ ही सोते और रहते हैं. हालांकि सुरक्षा को देखते हुए रात में यहां पर अपराधी, तथा कैदी को नहीं रखा जाता है. यदि कोई अपराधी पकड़ा जाता है, तो उसे रात में डुमरांव थाने में शिफ्ट कर दिया जाता है.
रात में भी नही सो पाते है पुलिसकर्मी : हादसे की आशंका से रात में भी पुलिसकर्मी सही ढंग से नहीं सो पाते हैं. सीलिंग का प्लास्टर टूट कर गिरता रहता हैं. आधे से अधिक भवन का प्लास्टर टूट कर गिर चुका है. कहीं-कहीं छत भी दब गया है, हर तरफ छत का सरिया दिख रहा है. कभी-कभी प्लास्टर पुलिसकर्मियों के ऊपर भी गीर जाता है. भय से पुलिसकर्मी हर समय सहमें रहते हैं.
वर्षो से भाड़े के मकान में चल रहा थाना : बताते चलें कि नया भोजपुर स्थित थाना का अपना भवन नहीं है. अपना भवन नही होने से किराए के भवन में थाना संचालित होता है. करीब 23 वर्षों से यह सिलसिला चल रहा है. यह पेपर मिल का जर्जर भवन है, जिसे किराये पर लिया गया है. बताया जाता है कि यह भवन बहुत पुराना पेपर मिल का है जो अब जर्जर अवस्था में पहुंच चुका है.
थाने में नही है, बुनियादी सुविधाएं : थाने के अंदर हाजत, सरिस्ता, मालखाना, बैरेक, तथा आगंतुक कक्ष जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नहीं हैं. थाना के आवश्यक कागजात फाइल रखने की भी कोई सुविधाएं नहीं हैं.
बरसात में सभी कमरों से टपकता है पानी : वैसे तो बरसात का सीजन बीत चुका है, लेकिन बरसात कब शुरू हो जाये ये किसी को पता नहीं बीते तीन चार दिन से जमकर बरसात हुई हैं. नया भोजपुर थाना अध्यक्ष चंदन कुमार ने बताया कि बरसात के मौसम में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है, क्योंकि बरसात के मौसम में सभी कमरे से पानी टपकने लगता है, जिसके चलते थाना की फाइलें व अन्य आवश्यक कागजात बचाने के लिए ऊपर से त्रिपाल टांगना पड़ता है, या आवश्यक कागजात को प्लास्टिक में छुपा कर रखना पड़ता है.
हर दिन जहरीले जीव जंतु का सातात है डर : पुलिसकर्मियों को भी त्रिपाल टांग कर रहना पड़ता है. बरसात के मौसम में हर तरफ भवन में रीसाव होते रहता है. रिसाव के कारण दीवालों में करेंट भी फैल जाता है, जिस कारण से हादसा की आशंका हर समय बनी रहती है. दिन हो या रात हो, थाने परिसर के अंदर हर समय सांप, बिच्छू जैसे जहरीले कीड़े- मकोड़े निकलते रहते हैं. हालांकि उन्होंने यह भी बताया कि भवन के नवीनीकरण के लिए मिट्टी जांच की प्रक्रिया मार्च महीने में ही पूरी कर ली गई है. उन्होंने कहा की भय की आतंक में रहते सुरक्षा कर्मी हर समय सहमे रहते है ताकि कोई अनहोनी न हो जाए. ऐसे में अब देखना यह है कि नया भोजपुर पुलिस कर्मियों की नया भवन विभाग की तरफ से कब तक उपलब्ध कराया जा रहा है.
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