वीर कुंवर सिंह कृषि महाविद्यालय, डुमरांव में कृषि उपादान विक्रेताओं के लिए चल रहे 15 दिवसीय प्रमाण पत्र कोर्स के तहत मशरूम उत्पादन तकनीक पर विशेष प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया गया. प्रशिक्षण में बक्सर समेत भोजपुर, रोहतास और कैमूर जिलों से आये 60 प्रशिक्षुओं के साथ कृषि छात्रों ने भी भाग लिया.
समेकित पोषक तत्व प्रबंधन पर चल रहा प्रशिक्षण
महाविद्यालय में कृषि उपादान विक्रेताओं के लिए समेकित पोषक तत्व प्रबंधन विषय पर 15 दिवसीय प्रमाण पत्र कोर्स चल रहा है. कार्यक्रम का उद्घाटन महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. पारस नाथ ने किया था. प्रशिक्षण के तीसरे दिन मशरूम उत्पादन को लेकर विशेष सत्र आयोजित किया गया.
मशरूम मैन डॉ. दयाराम ने दिया व्याख्यान
विशेष सत्र में बिहार के प्रसिद्ध ‘मशरूम मैन’ डॉ. दयाराम ने मशरूम उत्पादन तकनीक पर विस्तार से जानकारी दी. मृदा विज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. कस्तूरिका सेन बेउरा ने उनका स्वागत किया. उन्होंने प्रशिक्षुओं को मशरूम की वैज्ञानिक खेती से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दी.
वैज्ञानिक खेती और कंपोस्ट निर्माण की मिली जानकारी
प्रशिक्षुओं ने मशरूम की वैज्ञानिक खेती, कंपोस्ट निर्माण और उत्पादन की उन्नत तकनीक के बारे में जानकारी हासिल की. इसके साथ ही मशरूम उत्पादन के जरिए स्वरोजगार के अवसरों पर भी चर्चा हुई. प्रशिक्षण के दौरान प्रशिक्षुओं ने उन्नत पैकेज एवं पद्धतियों को लेकर कई सवाल पूछे.
प्रशिक्षुओं के सवालों का डॉ. दयाराम ने दिया जवाब
प्रशिक्षुओं की ओर से मशरूम उत्पादन से संबंधित पूछे गये सवालों का डॉ. दयाराम ने सरल तरीके से समाधान बताया. उन्होंने उत्पादन तकनीक के साथ मशरूम की खेती में जरूरी सावधानियों की जानकारी भी दी. इससे प्रशिक्षुओं को व्यावहारिक स्तर पर खेती समझने में मदद मिली.
कृषि वैज्ञानिक भी रहे मौजूद
कार्यक्रम में महाविद्यालय के वैज्ञानिक डॉ. सुमन लता, डॉ. जितेंद्र सिंह और डॉ. मणि भूषण भी मौजूद रहे. महाविद्यालय प्रशासन ने कहा कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम किसानों, कृषि उपादान विक्रेताओं और कृषि समुदाय के लिए उपयोगी साबित होंगे. इससे वैज्ञानिक कृषि तकनीकों को बढ़ावा देने के साथ स्वरोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे.
